लखनऊ, 4 नवंबर
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण प्रकरण की जांच के दौरान बड़ा आर्थिक नेटवर्क सामने आया है। STF की रिपोर्ट में आरोप लगा है कि एक डॉक्टर ने खास धर्म से जुड़े लोगों की निजी कंपनियों को संस्थान में कारोबार दिलाने में मदद की और इससे मिले कमीशन को लव जिहाद में इस्तेमाल किया गया।
तीन विभागों में किराये की मशीनें लगवाईं
आरोपों के मुताबिक, निजी कंपनियों के जरिए KGMU के यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभागों में किराए की मशीनें लगवाई गईं। दवा दुकानों से लेकर मेडिकल जांच में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों तक इन कंपनियों की मौजूदगी बढ़ाई गई। दावा है कि इस तरह संस्थान के अलग-अलग विभागों में निजी कंपनियों का कारोबार फैलाया गया।
STF रिपोर्ट में KGMU के तीन विभागों में किराए की मशीनें लगवाने का जिक्र है।
जगह और संसाधन देने के बदले कमीशन का आरोप
आरोप है कि निजी कंपनियों को KGMU परिसर में जगह और संसाधन उपलब्ध कराने के बदले प्रशासन को मामूली कमीशन दिया जाता था। वहीं, इन कंपनियों के मालिकों पर धर्मांतरण गतिविधियों को आर्थिक मदद देने का आरोप भी लगाया गया है। इससे संस्थान में निजी कंपनियों के कारोबारी हितों और कथित धर्मांतरण नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
डॉक्टरों और संस्थानों के संपर्कों की जांच
STF की रिपोर्ट में KGMU के अलग-अलग विभागों में तैनात डॉक्टरों, कर्मचारियों और मेडिकल संस्थानों के बीच संपर्कों का भी जिक्र है। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने KGMU प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद डॉक्टरों के निजी संस्थानों से जुड़ाव, निवेश और उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।







