दोस्तों, आज एक ऐसा सच जानिए, जो किताबों में आपसे छिपा लिया गया।
क्या कोई इंसान इतना कठोर हो सकता है कि घायल, बेघर लोगों से कहे — काम करोगे तो रोटी मिलेगी, वरना नहीं? जिनके पास पैसे नहीं, उन्हें खाना भी नहीं? ये बात किसी और ने नहीं, गांधी ने कही थी। और ये खुलासा बाहर वालों ने नहीं, उन्हीं के साथ रहने वाले लोगों ने किया था।
हद तो तब हो गई, जब गांधी ने नोआखली में हिंदुओं पर हुए अत्याचार का कारण ही हिंदुओं को बता दिया। उन्होंने कहा — हिंदुओं के पास ज्यादा संपत्ति है, इसलिए ये संघर्ष हो रहा है।
पूरी कहानी समझिए।
गांधी 29 अक्टूबर 1946 को दिल्ली से निकले। पहला पड़ाव कलकत्ता था। वहां बंगाल के मुख्यमंत्री सोहरावर्दी ने उनसे कहा — बकरीद तक नोआखली मत जाइए, आपके कलकत्ता में रहने से यहां शांति रहेगी। गांधी ने उनकी बात तुरंत मान ली। जबकि लोगों ने उन्हें चेताया था कि ये सोहरावर्दी की चाल है।
आखिर 6 नवंबर को गांधी टिपरा पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात सुचेता कृपलानी से हुई, जो बड़ी हिम्मत से दंगा पीड़ित हिंदुओं के कैंप चला रही थीं।
नोआखली में जब ब्रिटिश अधिकारियों ने राहत कैंपों में हिंदुओं का राशन बंद करने की बात कही, तो गांधी ने विरोध करने के बजाय सुझाव दिया — काम नहीं तो रोटी नहीं।
8 फरवरी को उन्होंने DM को पत्र लिखा। लिखा कि राशन के बदले हिंदू शरणार्थियों से सड़क बनवाई जाए, नारियल से तेल निकलवाया जाए, घर बनवाए जाएं, तालाबों की सफाई करवाई जाए। और जो काम से मना करे, उससे राशन के बदले पैसे लिए जाएं।
शिविरों की हालत जब और बिगड़ी, तो कई हिंदू अपने गांव लौटे। लेकिन वहां 80% मुसलमानों ने 20% हिंदुओं का आर्थिक बहिष्कार शुरू कर दिया था। फिर भी गांधी यही कहते रहे — सभी मुसलमान इसमें शामिल नहीं हैं।
18 फरवरी को तो उन्होंने कह दिया — अगर उचित मुआवजा मिले, तो हिंदू अपना घर छोड़ दें।
19 फरवरी की प्रार्थना सभा में जब लोगों ने इसका विरोध किया, तो वो पूरी घटना प्रफुल्ल चंद्र घोष ने अपनी किताब ‘गांधी एज आई सॉ हिम’ में लिखी है। घोष जी आजादी के बाद पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री बने थे।
उन्होंने लिखा — गांधी ने एक युवक से पूछा, हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या कितनी है? युवक बोला — 20% हिंदू, 80% मुसलमान।
फिर पूछा — जमीनें किस अनुपात में हैं? युवक बोला — 80% जमीन हिंदुओं के पास है।
तब गांधी ने कहा — यही इस संघर्ष की वजह है।
अब सोचिए, क्या हिंदू अमीर हैं तो गरीबों को उनके कत्ल का लाइसेंस मिल जाता है? वहां बड़ी संख्या में दलित नामशूद्र थे, जो बहुत गरीब थे। फिर भी उनका कत्ल हुआ, महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, जबरन धर्मांतरण हुआ।
गांधी भूल गए कि नोआखली अपनी मुस्लिम कट्टरता के लिए पहले से बदनाम था। वजह आर्थिक असमानता नहीं, जिहादी मानसिकता थी।
हिंदुओं को गांधी की एक और बात पर आपत्ति थी। नोआखली पहुंचते ही गांधी ने सेना और अतिरिक्त पुलिस हटाने की मांग कर दी। जबकि खुद गांधी की सुरक्षा में जीपों, ट्रकों में हथियारबंद पुलिस और सेना चल रही थी, जिसका जिक्र उनके निजी सचिव प्यारेलाल ने भी किया है।
खुद इतनी बड़ी सुरक्षा में चल रहे थे, और लोगों से कह रहे थे कि उन्हें सुरक्षा की जरूरत नहीं। मुसलमानों से एक बार भी नहीं कहा कि हिंसा मत करो, हमेशा हिंदुओं को ही सलाह दी।
ये सारी बातें आपसे छुपाई गईं।






