प्रयागराज
रामबाग स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर का इतिहास बेहद चमत्कारी और आस्था से भरा है। इस मंदिर की सेवा तीन पीढ़ियों से एक ही परिवार करता चला आ रहा है – पहले दादा, फिर पिता और अब बेटे हनुमान प्रसाद।
क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़ से बात करते हुए पुजारी हनुमान प्रसाद ने बताया कि ये बात 1961 की है, तब मेरी उम्र लगभग 10-11 साल की थी। नीम करोली बाबा जब भी प्रयागराज आते थे तो इस मंदिर में जरूर आते थे। मेरे बाबा से नीम करोली बाबा का संबंध बहुत ही अच्छा था।
सीढ़ियों पर बुजुर्ग महिला को देखकर बाबा ने हनुमान जी से कही थी ये बात
उन्होंने बताया – एक बार 1961 में नीम करोली बाबा दर्शन करके सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे। तभी एक बुजुर्ग महिला सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आ रही थी, जिसे काफी कष्ट हो रहा था। बाबा सीढ़ी के एक किनारे खड़े होकर यह सब देख रहे थे। फिर वह तुरंत वापस ऊपर गर्भगृह में गए और हनुमान जी से बोले – भगवन, आपको नीचे आना है, भक्तों को दर्शन करने में बड़ा कष्ट होता है। इतना बोलकर बाबा चले गए।
1963 में फटा सिंहासन और नीचे आकर विराजमान हो गए बजरंगबली
हनुमान प्रसाद ने बताया कि 1963 में मेरे दादा जी पूजा के बाद आरती कर रहे थे, तभी अचानक हनुमान जी का सिंहासन बीच से हल्का सा फट गया। दादा जी को तुरंत नीम करोली बाबा की कही हुई बात याद आ गई। उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए सिंहासन पर रखी सभी छोटी मूर्तियों को हटा दिया।
उसके बाद चमत्कार हुआ – सिंहासन सहित पूरी मूर्ति नीचे आकर मलबे के बीच में खड़ी हो गई, लेकिन मूर्ति में जरा सी भी खरोंच तक नहीं आई।
जब इस चमत्कार के बारे में नीम करोली बाबा को बताया गया तो उन्होंने कहा कि मंदिर का पुनः निर्माण करवाया जाए। जिसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 1967 में मंदिर बनकर तैयार हुआ और भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नीचे विराजमान हो गए…!!
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला







