सकलडीहा, चंदौली
भारी बारिश और तेज तूफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार होने की कगार पर खड़ी धान की फसल हवा और बारिश के चलते जमीन पर गिरकर बर्बाद हो रही है। महीनों की मेहनत, खाद, बीज, सिंचाई और खेती पर लगाए गए पैसे के बाद किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों को गहरा झटका दिया है।
इस गंभीर समस्या पर किसान नेता पिंटू पाल ने चिंता जताते हुए कहा कि किसान पहले से ही महंगाई, महंगे कृषि संसाधनों और खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं। ऐसे में भारी बारिश और तूफान से धान की फसल को हुए नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में गिरी फसल को देखकर अन्नदाता के सामने परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और खेती के खर्च की भरपाई का संकट खड़ा हो गया है।
पिंटू पाल ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों में राजस्व विभाग एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम भेजकर फसलों के नुकसान का तत्काल निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों को नियमानुसार जल्द से जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
उन्होंने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है। जब किसान की फसल बर्बाद होती है, तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर इसका असर पड़ता है। इसलिए किसानों की पीड़ा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। प्रशासन को कागजी कार्रवाई में देरी किए बिना धरातल पर उतरकर किसानों की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।
किसान नेता पिंटू पाल ने स्पष्ट कहा कि किसानों के हक और सम्मान की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित अन्नदाताओं को उनका उचित हक दिलाना जरूरी है। सरकार किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करे।







