बरुईन जमानिया (गाजीपुर)
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आम जनता तक उच्च स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लाख दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।ताजा मामला बरुईन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का सामने आया है, जहां डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह लापरवाह नजर आए।
अस्पताल में न तो समय पर डॉक्टर मिलते हैं और न ही मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहाँ तक कि अस्पताल परिसर में अव्यवस्था और गंदगी का अंबार यह बताने के लिए काफी है कि स्वास्थ्य विभाग के नियमों और स्वच्छता अभियानों को यहाँ किस तरह ठेंगा दिखाया जा रहा है।
समय की पाबंदी का अभाव अस्पताल के डॉक्टर और स्टॉफ निर्धारित सुबह 10:00 बजे के बजाय सुबह 10:30 बजे के बाद पहुँचते हैं।ताले में बंद कमरे आज, 28 अक्टूबर 2026 को जब एक मरीज को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल लाया गया, तो वहाँ चारों तरफ सन्नाटा पसरा था और अधिकांश कमरों में ताले लटके मिले।
सुविधाओं की बदहाली मरीजों की सहायता के लिए रखी जाने वाली व्हीलचेयर पर जाले लगे हुए थे और वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक मशीनों पर कबूतरों की बीट फैली हुई थी। इससे साफ जाहिर होता है कि यहाँ केवल कागजों में साफ-सफाई दिखाई जा रही है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
सवाल पूछने पर धमकी जब कुछ स्थानीय लोग सुबह 10:30 बजे के बाद दवा लेने पहुँचे और डॉक्टर से देरी से आने का कारण पूछा, तो वे अपनी गलती मानने के बजाय आगबबुला हो गए और पुलिस बुलाकर धमकाने लगे।
रिपोर्टर द्वारा पड़ताल और गैर-जिम्मेदाराना रवैया
जब ‘आशंका बुलेटिन न्यूज’ के रिपोर्टर ने मौके पर पहुँचकर इस लचर व्यवस्था और डॉक्टर की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, तो डॉक्टर साहब सफाई देने के बजाय अपनी मनमानी पर उतर आए। रिपोर्टर को जवाब देने के बजाय उन्होंने “काम में बाधा डालने” का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
हद तो तब हो गई जब अस्पताल प्रशासन की पोल खुलने पर रिपोर्टर को ही नियम सिखाए जाने लगे। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना था कि “आप यहाँ आने से पहले परमिशन (अनुमति) क्यों नहीं लेते?”इस पर बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जनता की बदहाली और भ्रष्टाचार की पोल खोलने या किसी मरीज की सुध लेने के लिए भी भ्रष्ट अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ेगी? क्या रिपोर्टर या आम जनता को स्वास्थ्य केंद्र जाने से पहले यह सूचना देनी होगी कि “हम आ रहे हैं, आप अपनी कुर्सियाँ साफ कर लें और व्हीलचेयर के जाले हटा लें?”
निगरानी का अभाव और जनता की पीड़ा
बरुईन स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों का बिना किसी उचित कारण के गायब रहना अब एक आम बात बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहाँ किसी भी प्रकार की प्रशासनिक निगरानी या औचक निरीक्षण का डर नहीं है, जिसके चलते स्वास्थ्य कर्मी अपनी मनमानी कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और सुलभ इलाज मुहैया कराना है, लेकिन बरुईन CHC जैसी जगहों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। आगे की मांग क्षेत्र की जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले का कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों ने अपील की है कि समय पर ड्यूटी से गायब रहने वाले, मरीजों से दुर्व्यवहार करने वाले और अस्पताल की व्यवस्था को पलीता लगाने वाले ऐसे लापरवाह कर्मियों के खिलाफ तत्काल सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को समय पर उचित स्वास्थ्य लाभ मिल सके।







