चंदौली
धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जनपद में लगातार हो रही तेज हवा और बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जनपद के शहाबगंज विकासखंड क्षेत्र में मौसम की मार का सीधा असर धान की फसल पर देखने को मिल रहा है। पिछले दो से तीन दिनों से तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश के कारण खेतों में तैयार हो रही धान की फसल बड़े पैमाने पर जमीन पर गिर गई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
शुक्रवार 30 अक्टूबर की सुबह जब किसान अपने खेतों की ओर पहुंचे तो कई जगह धान की फसल जमीन पर बिछी हुई मिली। गोविंदपुर, मसोई, एकौना, हड़ौरा, खिलची, केरायगांव, खखड़ा, परमंदापुर और राममाड़ो सहित क्षेत्र के कई गांवों में फसल गिरने की स्थिति सामने आई है। किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर मौसम की मार पड़ती दिखाई दे रही है।
किसानों के अनुसार, खेतों में गिर चुकी धान की फसल को दोबारा खड़ा करना मुश्किल है। इससे धान की बालियों के विकास, दानों की गुणवत्ता और कटाई पर असर पड़ सकता है। कई किसानों को उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका सता रही है। खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों के सामने अब आर्थिक संकट की चिंता भी बढ़ने लगी है।
बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में बने प्रचंड चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के प्रभाव से 28 अक्टूबर से प्रदेश में तेज हवाओं के साथ व्यापक बारिश की संभावना जताई गई थी। मौसम के इस बदलाव का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में खेती पर साफ दिखाई देने लगा है।
किसानों को राहत की दरकार
ऐसे में प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए शासन और प्रशासन से आवश्यक कदम उठाने की मांग उठ रही है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गांवों में पहुंचकर फसलों के नुकसान का स्थलीय सर्वेक्षण करे। नुकसान का उचित आकलन कर पात्र किसानों को सरकारी प्रावधानों के तहत मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि खेती पर निर्भर परिवारों को इस मुश्किल घड़ी में राहत मिल सके।
अब किसानों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि समय रहते प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उन्हें नियमानुसार राहत दिलाई जाए।







