किसान दिवस में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब लगभग 90% जिले स्तर के विभाग के संबंधित अधिकारी और कोई जिले का सक्षम अधिकारी उपस्थित नहीं था. किसान दिवस का संचलन सुचना अधिकारी भीम लाल कर रहे थे.किसानों ने इस बात की पुरजोर आवाज उठाई कि जब तक संबंधित विभागों के जिला स्तर के अधिकारी मीटिंग में नहीं होंगे तो जिले के किसानों की समस्या का हल किस प्रकार होगा. तमाम संगठनों के पदाधिकारी भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सतीश सिंह किसान विकास मंच के जिलाध्यक्ष राम अवध सिंह संयुक्त मजदूर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष पिंटू पाल किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव, रतन सिंह मुन्ना सिंह शेषनाथ आदि किसानों ने किसान नेताओं ने किसान दिवस का बहिष्कार किया करने का निर्णय लिया.
जब तक डीएम खुद किसान दिवस की अध्यक्षता नहीं करेंगे तब तक जिले के किसान किसान दिवस में सम्मिलित नहीं होंगे. भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता वाराणसी मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि इस समय धान की कटाई के बाद धान की बिक्री और गेहूं की बुवाई होनी है.इस समय किसान दिवस का बहुत महत्व है.इस सीजन में संबंधित विभागों के साथ जिले स्तर का बड़ा अधिकारी उपस्थित न होना ये दर्शाता है कि किसानों के प्रति प्रशासन का रवैय्या संवेदनहीन है. तमाम किसानों की मुआवजे का मुद्दा था,मुआवजे में किसानों को मुवावजा नहीं मिला, उसकी जगह भीख के रूप प्रति बीघा का ₹1000 मिला. जबकि कहा गया था
कि जिन जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है उसको पूरा मुआवजा मिलेगा. किसानों को मुआवजा का मतलब लागत मूल्य होता है. किसानों को लागत मूल्य भी नहीं दिया गया. कई किसानों ने अपनी मिली हुई धनराशि वापस कर दी. तमाम किसानों के सिंचाई के मुद्दे, धान बिक्री के मुद्दे, खाद के मुद्दे तमाम और मुद्दे थे जो कहीं ना कहीं छूट गए. अब किसान टकटकी लगाए देख रहे है है कि अगला किसान दिवस कब होगा.या चंद कथित किसानों के साथ मिलकर बैठक हो जाती है.यह देखने वाली बात होंगी. किसान प्रशासन के अगले कदम का इन्तजार करेंगे. अगर इस महीने किसान दिवस नहीं हुवा तो किसान आंदोलन धरना प्रदर्शन करने क़ो मजबूर होंगे.







