चन्दौली सैयदराजा
नगर पंचायत में चल रही श्री रामलीला में कलाकारों ने विभीषण शरणागति, सेतुबंध-रामेश्वरम् और अंगद-रावण संवाद का महत्वपूर्ण और भावनात्मक मंचन किया। मंदोदरी-रावण संवाद सुनकर लीला प्रेमी भाव-विभोर हो गए। व्यास की रामायण चौपाई और शास्त्रीय संगीत ने दर्शकों में हर्ष और रोमांच भर दिया।रावण द्वारा सीता को लौटाने से मना करने और विभीषण को अपमानित कर लंका से निकाल देने के बाद विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में आते हैं।

श्रीराम उन्हें गले लगाकर अपना लेते हैं। इससे संदेश मिलता है कि सच्चे मन से शरण में आने वाले को प्रभु क्षमा कर अपना लेते हैं।समुद्र पार करने के लिए श्रीराम ने तट पर तीन दिन तक प्रार्थना की। मार्ग न मिलने पर क्रोध में धनुष उठाया तो समुद्र देव प्रकट हुए और नल-नील के नेतृत्व में सेतु बनाने का मार्ग बताया। लंका पर चढ़ाई से पहले श्रीराम ने तट पर रामेश्वर महादेव की स्थापना और पूजन किया।युद्ध से पहले अंतिम प्रयास के रूप में बालि पुत्र वीर अंगद को दूत बनाकर रावण की सभा में भेजा गया। अंगद ने रावण को समझाया कि सीता को लौटाकर युद्ध टाल दे।
रावण के अहंकार करने पर अंगद ने सभा में पैर मजबूती से जमा दिया और चुनौती दी कि यदि कोई योद्धा उनका पैर हिला देगा तो श्रीराम सीता को छोड़कर लौट जाएंगे। रावण का कोई भी वीर अंगद का पैर नहीं हिला सका, जिससे रावण निःशब्द और अपमानित हुआ। इसके बाद लीला को विश्राम दिया गया।मंचन से श्रीराम की भक्ति, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश जनमानस को मिला। इसके बाद श्री रामलीला समिति शिवानगर द्वारा पत्रकारों व मीडिया बंधुओं को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर समाजसेवी मीना सिंह, शकुंतला नाथ दुबे, पूर्व चेयरमैन मदन कुशवाहा, वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र सिंह शक्ति, ओमकार केसरी, गोवर्धन तिवारी, राजेंद्र कसौधन, मोहनी चाय के संजय कश्यप, विजयी प्रधान, बल्लू केसरी, गौरव मौर्य सहित बड़ी संख्या में लीला प्रेमी उपस्थित रहे।







