सीज अस्पताल में फिर मरीजों की आवाजाही! स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल;

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चकिया, चंदौली

चकिया तहसील क्षेत्र में निजी अस्पतालों के संचालन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाबा कीनाराम हॉस्पिटल को सीज किए जाने के महज एक दिन बाद ही दोबारा संचालन शुरू होने की चर्चा ने विभागीय कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा दिया है। वहीं अस्पताल के दोबारा रजिस्ट्रेशन की चर्चा भी तेज है।

आरोप है कि अस्पताल का संचालन कथित झोलाछाप चिकित्सक डॉ अंजू कुमारी जिनके सहयोगी डॉ रंजन दाश के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता और मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।

सीज के बाद किसके आदेश पर शुरू हुआ संचालन?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल को विधिवत सीज किया गया था तो अगले ही दिन दोबारा संचालन कैसे शुरू हो गया? क्या नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराया गया है? यदि हां, तो किन मानकों की जांच के बाद अनुमति दी गई? स्वास्थ्य विभाग को इसकी स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

सीएमओ की भूमिका पर सवाल

मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग को अस्पताल के दोबारा संचालन की जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई के बाद निगरानी नहीं की गई? कथित लेनदेन की चर्चाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

तहसील प्रभारी की रिपोर्ट के बाद बढ़ी निगाहें

मामले में चकिया तहसील प्रभारी प्रशांत कुमार की रिपोर्ट का भी उल्लेख सामने आया है। अब जिलाधिकारी और सीएमओ से अपेक्षा है कि अस्पताल की सीलिंग, दोबारा संचालन, रजिस्ट्रेशन और संबंधित चिकित्सक की योग्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

बड़ा सवाल: आखिर सीज अस्पताल दूसरे ही दिन कैसे गुलजार हो गया? यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? मरीजों की जिंदगी से जुड़े इस गंभीर मामले में अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

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