बांग्लादेश ने इस साल का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक मजाक कर दिया है। वह भारत से पानी मांग रहा है और अगर भारत ने पानी देने से मना कर दिया, तो भारत का बहिष्कार करने की धमकी दे रहा है;

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अगले महीने यानी दिसंबर 2026 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई 30 साल पुरानी गंगा जल संधि खत्म हो रही है। इस समझौते के तहत पिछले तीन दशकों से भारत कानूनी रूप से इस बात के लिए बाध्य था कि सूखे के मौसम में फरक्का बैराज से हर सेकंड 35,000 क्यूसेक पानी बांग्लादेश को छोड़े। भले ही उस समय पश्चिम बंगाल के अपने किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हों, लेकिन भारत को समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी देना पड़ता था।

अब बांग्लादेश को इस संधि को दोबारा आगे बढ़ाने की सख्त जरूरत है, क्योंकि उसकी खेती और पानी की जरूरतें इससे जुड़ी हुई हैं। लेकिन जिस पड़ोसी देश को भारत से बातचीत करके अपनी समस्या का हल निकालना चाहिए, वह भारत को ही धमकियां देने पर उतर आया है।

बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम ने ढाका में एक मंच से खड़े होकर भारत को खुली धमकी दी है। उनका कहना है कि भारत पहले इस बात की गारंटी दे कि बांग्लादेश को उसके हिस्से का पूरा पानी मिलेगा, वरना बांग्लादेश भारतीय सामानों का बहिष्कार करेगा और अपने देश से होकर गुजरने वाले भारत के सभी ट्रांजिट रास्तों को हमेशा के लिए बंद कर देगा।

अब जरा इस धमकी के पीछे की हकीकत समझिए। बांग्लादेश भौगोलिक रूप से निचले इलाके में बसा हुआ देश है। उसकी नदियों और खेती के लिए पानी की जरूरत काफी हद तक भारत से आने वाले पानी पर निर्भर करती है। उसे अपने खेतों की सिंचाई करनी है, अपनी फसलों को बचाना है, तो भारत की नदियों और बांधों से पानी छोड़ना जरूरी है।

लेकिन कमाल देखिए! जिस भारत से उसे पानी चाहिए, उसी भारत को वह व्यापार बंद करने और रास्ते रोकने की धमकी दे रहा है।

उसे भारत का सबसे कीमती प्राकृतिक संसाधन यानी पानी तो चाहिए, लेकिन भारत के साथ उसका व्यवहार ऐसा है, जैसे भारत कोई पड़ोसी नहीं, बल्कि उसका दुश्मन हो।

और अगर नाहिद इस्लाम और ढाका के दूसरे नेताओं को लगता है कि भारत के ट्रांजिट रास्ते बंद करने की धमकी देकर वे भारत पर दबाव बना लेंगे, तो उन्हें यह भी समझना चाहिए कि भारत कोई ऐसा देश नहीं है, जो सिर्फ धमकियां सुनकर अपनी नीतियां तय करेगा।

भारत के पास भी अपने हितों की रक्षा करने के लिए विकल्प मौजूद हैं। अगर बांग्लादेश भारत के रास्ते बंद करने की बात कर सकता है, तो भारत को भी अपने किसानों, अपनी नदियों और अपने देश के हितों को सबसे ऊपर रखने का पूरा अधिकार है।

जरा सोचिए, बांग्लादेश एक तरफ भारत के सामानों का बहिष्कार करने की बात कर रहा है, दूसरी तरफ भारत के ट्रांजिट रास्ते हमेशा के लिए बंद करने की धमकी दे रहा है और तीसरी तरफ उसी भारत से 30 साल पुरानी गंगा जल संधि को आगे बढ़ाने की गुहार लगा रहा है।

आखिर यह कैसी राजनीति है? पानी भी भारत से चाहिए, समझौता भी भारत से चाहिए, लेकिन बातचीत धमकी देकर करनी है!

अब अगर भारत भी अपने हितों को ध्यान में रखकर फरक्का बैराज से पानी छोड़ने के मामले में सख्त रुख अपनाता है, तो बांग्लादेश के इन नेताओं के पास क्या जवाब होगा? जब बांग्लादेश की नदियों में पानी की कमी होगी और उसकी खेती पर संकट आएगा, तब भारत के ट्रांजिट रास्ते बंद करने की धमकी आखिर कितनी काम आएगी?

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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