नारायण दत्त तिवारी और मुलायम सिंह यादव
भारत के दो महान अय्याश समाजसुधारक हर महिला को आशाराम बापू के नजर से देखने वाले जिनके महलों से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटा।
मुझे पता है कि समाजवादी पार्टी के लोग और कांग्रेस के लोग हमको गाली देंगे । अप शब्द बोलेंगे यह मुझे पता है, फिर भी सत्य को कहने की हिम्मत रखता हूं और कहूंगा । इसके पीछे मेरी जो भी दुर्दशा हो मैं संभाल लूंगा । मेरी बात मेरी पोस्ट से अगर समाजवादी पार्टी के लोगों को अगर कांग्रेस के लोगों को बुरा लगता है तो मेरे पोस्ट में जस्टिफाई करके बताएं मैं गलत हूं या मेरी पोस्ट गलत है या यह दोनों नेता गलत है ।
#नारायण_दत्त_तिवारी जी का चरित्र हनन तब हुआ जब #आंध्र_प्रदेश के राज्यपाल रहे, किसी अजनबी रोहित शेखर ने उन्हें अपना जैविक पिता बताया और दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की उनकी माता उज्ज्वला शर्मा से उनके रिश्ते थे, नारायण दत्त तिवारी जी ने पहले इस दावे को खारिज कर दिया उसके बाद DNA टेस्ट कराने से भी इनकार कर दिया, राजनीतिक साजिश बताया।
अदालत के कड़े रुख के बाद 2012 में तिवारी जी का डीएनए सैंपल लिया गया। जुलाई 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें यह 99.9% साबित हुआ कि नारायण दत्त तिवारी ही रोहित शेखर के जैविक पिता हैं।
मार्च 2014 में तिवारी ने सार्वजनिक रूप से रोहित शेखर को अपना बेटा स्वीकार कर लिया। इसके बाद मई 2014 में 88 वर्ष की उम्र में तिवारी ने उज्ज्वला शर्मा से औपचारिक रूप से विवाह कर लिया।
#मुलायम_सिंह_यादव_जी की मुलाकात साधना गुप्ता से उनके गेस्ट हाउस में हुई थी, साधना गुप्ता समाजवादी पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता थी, मुलायम सिंह उन्हें धीरे – धीरे पसंद करने लगे, मालती देवी जी (धर्म पत्नी) के कारण, वे अपने अफेयर्स को छिपाते रहे 2003 में जब मालती देवी जी की मौत हुई।
23 मई 2003 को साधना गुप्ता से शादी कर ली, कुछ दिन ही बीते थे चिता ठंडी भी नहीं हुई थी।
2003-2007 तक वे अपनी शादी को छिपाते रहे,
उन्हें पत्नी का दर्जा नहीं दिया फिर 2007 के आय से अधिक संपति मामले में उन्होंने साधना गुप्ता जी को पत्नी और प्रतीक यादव को बेटे के तौर पर स्वीकार किया।
लेकिन अखिलेश यादव ने कभी माँ नहीं माना सौतेले भाई प्रतीक यादव से भी अनबन रहती थी॥
मुलायम सिंह यादव और नारायण तिवारी दोनों के आईडियोलॉजी के खिलाफ मैं रहा हूं ,लेकिन जो इन्होंने कार्य किया उसको स्वीकार भी करता हूं ,नारायण तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने नारायण दत्त की ऐसे नेता है जो दो-दो राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके हैं, और एक चंद्रबाबू नायडू है जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री बने । पहली बार 1976 में मैं जीवन में नारायण दत्त तिवारी जी का ही हेलीकॉप्टर बलिया में देखा था ,लेकिन किस प्रकार रोहित शेखर उनके पुत्र होने का दावा किया किस प्रकार लड़के सामने आए किस प्रकार जीते और कितना जल्दी उनका अंत हो गया आपको भी याद होगा ।
मुलायम सिंह यादव के विचारों का विरोधी रहते हुए भी मुलायम सिंह यादव के संघर्ष के दिनों से मैने उनका राजनीतिक देखा है । मुलायम सिंह यादव दोस्ती इस प्रकार निभाते थे की अपना वजूद नहीं देखते थे लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि मुलायम सिंह की यही थी कि वह दोस्ती बहुत अच्छी तरह निभाते थे । चाहे किसी जाति से हो चाहे किसी मजहब से हो दूसरी बार मुलायम सिंह यादव एक सामान्य परिवार से आते थे, उनके रिश्तेदार इनके जानने वाले ब्रिगेडियर नहीं हवलदार हुआ करते थे । इसलिए रक्षा मंत्री रहते हुए इन्होंने बहुत अच्छे कार्य हवलदार लेवल के लोगों के लिए किया जिससे मैं सदा आभारी रहूंगा । लेकिन प्रतीक यादव जी को पुत्र की जो इज्जत होनी चाहिए नहीं मिली और अंततः उनको मरना पड़ा । यह भी सब जानते हैं इसलिए अच्छाई के साथ-साथ उनकी बुराई भी आपको जानना चाहिए । राजनीति में यह दोनों लोग चरम पर पहुंचे लेकिन हिंदुत्व के अनुसार हिंदू धर्म के अनुसार उनके विचार बहुत बुरे थे और इन्होंने एक पत्नी रहने के बाद भी दूसरी पत्नी से शादी किया और दूसरा बात उनसे होने वाली औलादे को अपनी विरासत से दूर रखा ।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला







