जमदग्निपुरी जमानियां जिला गाजीपुर के ऐतिहासिक नगरी जमानियां (प्राचीन नाम ‘जमदग्निपुरी’) में महर्षि जमदग्नि की भव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ।इस पावन अवसर पर पूरा क्षेत्र ‘जय जमदग्नि’, ‘जय परशुराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजाइशित हो उठा। तीन दिवसीय पावन अनुष्ठान का भव्य आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का संचार करने वाला एक बड़ा यादगार बन गयाl
24-25 अक्टूबर इन दो दिनों तक विधि-विधान के साथ विशेष पूजन-पाठ और अनुष्ठान संपन्न किए गए , जिसके बाद 26 अक्टूबर यानी आज अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। यह ऐतिहासिक एवं गरिमामयी आयोजन ग्राम कूंसी निवासी पं० राम गोविन्द त्रिवेदी के पौत्र एवं जमानियां विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के पूर्व प्रत्याशी श्रद्धेय बाल कृष्ण त्रिवेदी तथा जमानियां नगर पालिका के चेयरमैन जय प्रकाश गुप्त के तन, मन और धन के विशेष सहयोग से सुसंपन्न किया गया।
संपूर्ण अनुष्ठान का कुशल नेतृत्व गहमर निवासी एवं काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी) के अध्यक्ष के सचिव पं० शैलेन्द्र उपाध्याय द्वारा किया गया। महर्षि जमदग्नि और जमानियां का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व पौराणिक पृष्ठभूमि: ऋग्वेद में उल्लिखित धार्मिक ऋषियों में महर्षि जमदग्नि का नाम प्रमुखता से आता है। वे महर्षि विश्वामित्र के सहयोगी भी रहे हैं। भृगुवंशी महर्षि जमदग्नि के पिता ऋचीक और माता सत्यवती थीं। नाम की व्युत्पत्ति: पं० मधूसुदन ओझा के अनुसार, “चक्षु ‘जमदग्नि’ ऋषि हैं।
‘जमत्’ शब्द ‘जगमत्’ से गकार का लोप होकर बना है, ‘जगमत’ अर्थात जगत को जिससे पहचाना जाये, वह ‘जमत’ हुआ। यों ‘चक्षु’ (आंख) ‘जमत्’ भी है, और प्रकाशशील (चमकदार) होने के कारण ‘अग्नि’ भी है। देखने के कारण ऋषि है (ऋषिदर्शनात्)। इस प्रकार चक्षु ‘जमदग्नि ऋषि’ हुआ।”
सप्तर्षियों में एक विशेष महर्षि जमदग्नि की गणना सप्तर्षियों में की जाती है और वे भगवान परशुराम के पिता हैं।
जमानियां का नामकरण को लेकर पुन एक बार विचार विमर्श होने लगा है जो प्राचीन काल में जमानियां का वास्तविक नाम ‘जमदग्निपुरी’ ही था, जिसे बाद में मुगल काल में बदलकर जमन खां के नाम पर ‘जमानियां’ कर दिया गया था। जिसे बदल कर पुन एक बार जमदग्निपुरी रखने का विचार विमर्श होने लगा है।
कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों को प्राचीन एवं ऐतिहासिक ग्रंथों की प्रतियां भेंट कर सम्मानित किया गया जिसमें बाल कृष्ण त्रिवेदी को उनके पितामह की दुर्लभ रचना ‘वैदिक साहित्य’ का प्राचीन संस्करण भेंट किया गया।
मोहम्मदाबाद के गोपीनाथ कॉलेज के संस्थापक राकेश तिवारी को सम्मानित किया गया।
आचार्य शैलेन्द्र उपाध्याय जी को डॉ० राम प्रकाश उपाध्याय द्वारा लिखित पराशर गोत्रीय गंगेश्वर वंशीय मूल वंशावली ‘गंगेश्वर जीवन दर्शन’ भेंट की गई।अत पुनः बताते चले कि यह पूरा आयोजन जमानियां क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्रवासियों और उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार से पुरजोर आग्रह किया गया हैl कि जमानियां का नाम पुनः बदलकर ‘जमदग्निपुरी’ किया जाए, ताकि इस क्षेत्र का प्राचीन पौराणिक गौरव और इतिहास वापस लौट सके।इस अवसर पर क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक, संत समाज और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।







