बीता हुआ समय , इतिहास तो बन जाता है…उसे हमलोग पढ़कर .. किनारे कर देते हैं ..पर आप ये हमेशा स्मरण रखें कि इतिहास मौन नहीं रहता …वह तो चिख पुकार कर हम सबको … बताना चाहता है कि गलतियां ना दुहराएं. पर उसे प्रायः हमलोग अनदेखी कर देते हैं…. जिसका परिणाम … स्वयं एक दिन वही इतिहास…. एक शव यात्रा में बदल जाता है।

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बीता हुआ समय , इतिहास तो बन जाता है…उसे हमलोग पढ़कर .. किनारे कर देते हैं ..पर आप ये हमेशा स्मरण रखें कि इतिहास मौन नहीं रहता …वह तो चिख पुकार कर हम सबको … बताना चाहता है कि गलतियां ना दुहराएं. पर उसे प्रायः हमलोग अनदेखी कर देते हैं…. जिसका परिणाम … स्वयं एक दिन वही इतिहास…. एक शव यात्रा में बदल जाता है।
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‎याद करें 20वीं सदी का जर्मनी ….. जहां यहूदी सिर्फ एक धर्म नहीं …. वो ज्ञान के निर्माता, विज्ञान के जनक, बैंकिंग के स्तंभ, शिक्षा के मार्गदर्शक और संस्कृति के संरक्षक थे।
‎वैसे ही सनातन धर्म संस्कृति…ज्ञान, विज्ञान, मानवता, संस्कृति का केंद्र है ,पर हिन्दू आज भारत सिमट गए हैं। कोई और नहीं देश ।
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‎पर जब हिटलर की नाज़ी विचारधारा ने करवट ली—
‎तो इन्हीं बहुसंख्यक यहूदियों को “”षड्यंत्रकारी “‘ , राष्ट्रविरोधी और
‎”ये हमारी गरीबी के ज़िम्मेदार हैं” । जब कि जर्मनी के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान था।
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‎मीडिया, शिक्षा, और राजनीति को हथियार बनाया गया, और जनता को घृणा की आग में झोंक दिया गया।
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‎और फिर…
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‎सिर्फ चार वर्षों में, नाज़ियों ने …60 लाख यहूदियों को गैस चेंबरों में झोंका, बच्चों को माँ की गोद से छीनकर मार डाला, लोगों को जिंदा जला दिया… इतिहास कांप उठा, पर इंसान नहीं जागे।
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‎और यह सब हुआ… क्योंकि यहूदी बहुसंख्यक होते हुए भी “”असंगठित “”थे।
‎वो नाजीयों का विरोध नहीं किए ….. सिर्फ सोचते रहे – “हमें कुछ नहीं होगा…” वैसे ही आज देश का बहुसंख्यक समुदाय हिन्दू सोच रहा है ।
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‎ध्यान देनेवाली बात है कि यहुदियों को ज्ञान,समझ थी … पर जागरूकता , एकजुटता नहीं थी … धन तो प्रचूर मात्रा में थी … पर साहस और आत्मरक्षा का अभाव था।
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‎लेकिन जब मृत्यु की राख से जब पुकार उठी तो जन्म हुआ एक नया देश ……”” इजराइल””.
‎अब इतिहास के बीते … उन पलों को यहुदियों ने याद किया कि आत्मरक्षा,साहस, अन्याय का विरोध करना आवश्यक.. तब देश के हर व्यक्ति 16 वर्ष की आयू में सैनिक शिक्षा अनिवार्य कर दिया । जिसका परिणाम आज विश्व के देश देख रहे हैं ।
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‎तो भाई राष्ट्र की अस्मिता , सुरक्षा सर्वोपरि… उसके बाद ही धर्म, पंथ , दल, जातिवाद , धन दौलत …. यदि राष्ट्र ही सुरक्षित नहीं … तो जातिवाद किस काम के … सब ध्वस्त हो जाएगा ।
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‎आज हिन्दू समाज वहीं गलतियां दुहरा रहा है……आपसी फूट, जातिगत द्वेष में उलझे हुए हैं.. इन सेक्युलर ताकतों का विरोध न कर मौन तमाशा देख रहे हैं।
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‎अब अपने देश भारत को देंखे कि किस तरह पिछले 70 वर्षों से कांग्रेस, वामपंथी बंग्लादेशी, रोहिंग्या मुसलमान को बसाते आया है … देश की “demography”” बदल चुका है, अनेकों राज्यों और कस्बों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुका है, पलायन की स्थिति आ गई है …. , फिर भी हम मौन रह रहें हैं ये सोचकर कि चलो हम बचे हुए हैं.. लेकिन कब तक . …
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‎क्या आप जानते हैं?
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‎यहूदी धर्म, जो हजारों सालों पुराना है,
‎आज दुनिया में सिर्फ 2 करोड़ यहूदी बच पाया है। और वहीं इस्लाम और ईसाई,
‎जो बाद में आए— आज 5 अरब से अधिक लोगों की वैश्विक ताकत बन चुके हैं,
‎क्योंकि उनके पास है — धर्म आधारित एकता।
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‎जब भारत-पाकिस्तान युद्ध होता है,
‎तो तुर्की, मलेशिया, ईरान, इंडोनेशिया, सीरिया, अज़रबैजान, सऊदी अरब—
‎सब खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े होते हैं। क्यों? क्योंकि मज़हब एक है।
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‎और भारत के साथ?
‎सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी और राजनयिक पंक्तियाँ।
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‎अब सोचिए—
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‎अगर यह भारत नहीं रहा तो…
‎क्या हिंदुओं के पास कोई इज़राइल है?
‎नहीं!
‎यह धरती का अंतिम टुकड़ा है जहाँ हिंदू सुरक्षित …
‎इसलिए भारत बचाना, खुद को बचाना है।
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‎आज …….
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‎रोहिंग्या को वकील मिल जाते हैं,
‎बांग्लादेशी घुसपैठियों को राशन और वोटर ID मिल जाती है,
‎लेकिन राम मंदिर की बात करने पर आपको “कट्टर” कहा जाता है।
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‎गीता पढ़ने पर “कट्टर हिंदुत्व” का ठप्पा लगता है।
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‎और आप चुप हैं?
‎क्यों?
‎
‎अब नहीं जागे,
‎तो आने वाली पीढ़ियों के इतिहास की किताबों में
‎”हिंदू” एक संस्कृति नहीं,
‎एक भूली हुई सभ्यता के रूप में दर्ज होगा।
‎
‎इसलिए…
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‎जाति नहीं, जननी बड़ी है।
‎
‎भाषा नहीं, भारत बड़ा है।
‎
‎दल नहीं, धर्म बड़ा है।
‎
‎खुद नहीं, संघर्ष बड़ा है।
‎
‎आज भी समय है —
‎संगठित हो जाइए ……जाग जाइए,
‎क्योंकि अगर अब नहीं जागे, तो अगली बार राख तक नहीं बचेंगी।
‎
‎सभी सनातनी अपना अनमोल विचार दें….
‎
‎ “”” राष्ट्र हित सर्वोपरि”””

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

 

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