मीरजापुर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के पालन में गांधी जयंती के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर के तत्वावधान में जनपद के विभिन्न विद्यालयों में पोक्सो अधिनियम, 2012 को लेकर विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के क्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय संजय कुमार शुक्ला एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर आनन्द कुमार द्वितीय द्वारा सेमफोर्ड विद्यालय, मीरजापुर में, न्यायिक अधिकारी, ग्राम न्यायालय मड़िहान अभिनव देवेश शुक्ला द्वारा ओम साईं जनता जनार्दन इंटर महाविद्यालय, कलवारी मड़िहान में, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वितीय सोनाली मिश्रा द्वारा सेंट मेरीज विद्यालय, पीली कोठी में, सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी / त्वरित न्यायालय तान्या गुप्ता द्वारा

राजस्थान इंटर महाविद्यालय, मीरजापुर में तथा न्यायिक अधिकारी, ग्राम न्यायालय मड़िहान सुमित कुमार यादव द्वारा बाबू इंटर महाविद्यालय, लालगंज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त जनपद के अन्य विद्यालयों में पराविधिक स्वयंसेवकों द्वारा छात्र-छात्राओं को जानकारी दी गई।
कार्यक्रमों में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रमुख प्रावधानों, बालकों के विधिक अधिकारों, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, बाल यौन शोषण की पहचान, अपराध की सूचना देने की प्रक्रिया तथा अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित कानूनी परिणामों के संबंध में सरल और व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे के साथ यौन संबंध बनाना या बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाना अपराध की श्रेणी में आता है, भले ही उस बच्चे ने अपनी सहमति दी हो। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की सहमति का कानून में कोई महत्व नहीं होता।
बच्चों को संदेश दिया गया कि प्रत्येक बालक-बालिका की सुरक्षा एवं संरक्षण कानून की प्राथमिकता है। साथ ही बाल सहायता नंबर 1098, पुलिस सहायता नंबर 112 एवं निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता के बारे में भी अवगत कराया गया।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर द्वारा बताया गया कि बच्चे देश के भविष्य हैं, इसलिए उनकी सही देखभाल, सही परवरिश और सही ज्ञान बहुत जरूरी है। केवल पढ़ाई से बेहतर भविष्य नहीं बनाया जा सकता। सामाजिक, मानसिक और शारीरिक ज्ञान की बहुत आवश्यकता है, खासकर आज के इस आधुनिक संचार माध्यमों के युग में, जहां बच्चों को हर समय अनावश्यक सामग्री बड़ी आसानी से उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित, खुशहाल एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। हर बच्चे की सुरक्षा केवल माता-पिता की ही जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।







