जौनपुर
कहते हैं। कि आज के दौर में जब छोटी-सी चीज भी लोगों की नीयत बदलने के लिए काफी होती है। ऐसे समय में अगर कोई लाखों रुपये से भरा बैग पाकर भी उसे सुरक्षित उसके असली मालिक तक पहुंचा दे। तो यह सिर्फ ईमानदारी नहीं बल्कि इंसानियत की ऐसी मिसाल है। जिस पर पूरा समाज गर्व कर सकता है।
जौनपुर के एस. एन. कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रबंधक संतोष कुमार अग्रहरि के साथ महाराष्ट्र में सफर के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ। जिसने कुछ समय के लिए उनके परिवार और परिचितों की चिंता बढ़ा दी। उनका बैग महाराष्ट्र में कहीं छूट गया, जिसमें करीब डेढ़ लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, फ्लाइट टिकट, आईडी एवं जरूरी कागजात सहित अन्य महत्वपूर्ण सामान रखा हुआ था।
बैग के गायब होने की जानकारी मिलते ही स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई। सामान की कीमत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसमें रखे जरूरी दस्तावेज और व्यक्तिगत वस्तुएं थीं। लेकिन इसी बीच उम्मीद की एक किरण सामने आई।
सुरक्षा गार्डों की ईमानदारी ने पूरी कहानी ही बदल दी।
बैग सुरक्षित मिला और उसमें रखा सामान भी ज्यों का त्यों सुरक्षित वापस मिल गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दुनिया में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं। जिनके लिए ईमानदारी किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि संस्कार का नाम है।
इस पूरे घटनाक्रम में Aslam Mankar, Nihal Shikh और Kiran Waghadare जैसे ईमानदार सुरक्षा गार्डों की भूमिका ने दिल जीत लिया। उन्होंने चाहा होता तो किसी को कुछ पता भी नहीं चलता। लेकिन उन्होंने इंसानियत और अपनी जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखा।
जौनपुर के लिए यह सिर्फ बैग मिलने की खबर नहीं, बल्कि इंसानियत के जिंदा होने की खबर है।
संतोष कुमार अग्रहरि का सामान सुरक्षित वापस मिलने की खबर से उनके शुभचिंतकों और जौनपुरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। क्योंकि खोई हुई दौलत का वापस मिलना एक बात है। लेकिन खोई हुई उम्मीद का वापस लौटना उससे कहीं बड़ी बात है।
आज जरूरत है। कि ऐसे ईमानदार लोगों को सिर्फ धन्यवाद न दिया जाए। बल्कि उनके कार्य को समाज के सामने लाकर नई पीढ़ी को ईमानदारी, कर्तव्य और मानवता का पाठ पढ़ाया जाए।
Aslam Mankar, Nihal Shikh और Kiran Waghadare को दिल से सलाम।
आपकी ईमानदारी ने सिर्फ एक बैग नहीं लौटाया, बल्कि एक विश्वास भी लौटाया है। कि
इंसानियत अभी जिंदा है। और जब तक ऐसे लोग समाज में मौजूद हैं। तब तक भरोसा भी जिंदा है।







