सकलडीहा चंदौली
आदर्श ग्राम नागेपुर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर सिंचाई व जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गाँव से होकर गुजरने वाली मुख्य सिंचाई नाली (गूल) देखरेख और नियमित सफाई के अभाव में पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। वर्तमान में धान की रोपाई और फसलों की सिंचाई का चरम सीजन चल रहा है, लेकिन सिंचाई नाली की इस दुर्दशा के कारण सैकड़ों बीघा फसलों पर सूखने का संकट मंडराने लगा है।

स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग तथा ग्राम प्रधान द्वारा लंबे समय से इस नाली की सुध नहीं ली गई है। नाली के भीतर भारी मात्रा में गाद (सिल्ट), जंगली घास और झाड़ियां उग आई हैं, जिसने पानी के प्राकृतिक बहाव को पूरी तरह रोक दिया है। इसके अलावा, नाली के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही बीच में ही लीक होकर व्यर्थ बह जाता है।
नहर की नाली ठप होने से परेशान किसानों को अब अपनी फसलों को बचाने के लिए मजबूरन निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों की प्यास बुझाने के लिए किसान महंगे दामों पर निजी ट्यूबवेल और पंपसेट किराए पर लेकर सिंचाई कर रहे हैं। इससे डीजल और पानी की खरीद पर उनका कृषि खर्च कई गुना बढ़ गया है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की कमर टूट रही है।
गाँव के स्थानीय प्रगतिशील किसानों का कहना है:”हर साल कागजों पर सफाई का बजट पास होता है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस है। अगर एक हफ्ते के भीतर इस सिंचाई नाली की पोकलेन या मैन्युअल तरीके से सफाई कराकर पानी बहाल नहीं किया गया, तो हमारी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
हम सभी ग्रामीण जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को सामूहिक प्रार्थना पत्र सौंपकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस संबंध में सुरेंद्र यादव ने बताया कि उप जिलाधिकारी को पत्र भी दी गई है जिसे शीघ्र निदान की उम्मीद जगी थी। परंतु अभी तक कोई भी ठोस का कार्यवाही नहीं हुई है। जब कि इसी नाली से इस क्षेत्र के किसानों की सिंचाई भी होती है तथा ग्राम सभा के जल निकासी का भी यही मुख्य रास्ता है।
रिपोर्ट – आलिम हाशमी










Users Today : 3
Users This Year : 24682
Total Users : 37275
Views Today : 5
Total views : 73313