आयुर्वेद बोर्ड में 41 फर्जी डॉक्टरों के पंजीयन का मामला, डॉ. शैलेश राय ने की सीबीआई जांच की मांग

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वाराणसी: 

आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, उत्तर प्रदेश में 41 फर्जी डॉक्टरों के पंजीयन का मामला गरमा गया है। बोर्ड के निवर्तमान उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय ने जगतगंज स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए और हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की।

डॉ. राय ने बताया कि वर्ष 2020 से अप्रैल 2022 तक बोर्ड में राज्य सरकार द्वारा कंट्रोलर नियुक्त था और डॉ. अखिलेश वर्मा 2017 से प्रतिनियुक्ति पर रजिस्ट्रार हैं। आरोप है कि इस दौरान 15-15 लाख रुपये लेकर फर्जी पंजीयन किए गए। वर्ष 2021 में श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, कुरुक्षेत्र हरियाणा के नाम पर 41 लोगों के बीएएमएस के मार्कशीट, सर्टिफिकेट और अनापत्ति प्रमाण पत्र फर्जी बनाकर वेरिफिकेशन के आधार पर पंजीयन कर दिया गया।

शिकायतकर्ता फुरकान अली निवासी रामपुर ने 16 जुलाई 2024 को आयुष मंत्रालय में शिकायत की थी। अप्रैल 2025 में एनसीआईएसएम की टीम ने जांच में 41 पंजीयन फर्जी पाए। आरोप है कि रजिस्ट्रार ने 17 अप्रैल 2025 को खुद ही बिना अधिकार के पंजीयन निरस्त कर मामले को दबाने की कोशिश की और बोर्ड की 25 अप्रैल की बैठक में मामला नहीं रखा।

डॉ. शैलेश राय ने कहा कि रजिस्ट्रार ने प्रमुख सचिव आयुष और आयुष मंत्री के साथ मिलकर बोर्ड को निष्क्रिय बनाए रखा। 2 अगस्त 2026 को मामला संज्ञान में आने पर 10 अगस्त को बैठक बुलाई गई और मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की गई। इसके बाद 10 अगस्त को ही बोर्ड को भंग कराकर कंट्रोलर नियुक्त कर दिया गया और चुनाव घोषित कर दिया गया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

उन्होंने बताया कि 22 अगस्त 2026 को 41 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ थाना हुसैनगंज, लखनऊ में FIR के लिए तहरीर दी गई, लेकिन उसमें रजिस्ट्रार समेत नामजद लोगों का नाम नहीं है।

डॉ. राय ने कहा कि यह बड़ा अंतरराज्यीय रैकेट है और इसकी निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई या सक्षम एजेंसी से कराई जाए।

 

 

रिपोर्ट – विवेक कुमार यादव

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