सरकार और प्रशासन के दावे हुए फेल
मंगलवार के दिन बारिश ने फिर सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी। इससे पहले भी कई बार अक्सर देखा गया है कि सड़क पर जलभराव व लखनऊ के कई हिस्सों में यहां तक घर तक पानी चला जाता है।
मंगलवार के दिन ऐसा ही कुछ फिर देखने को मिला जहां सड़के जलभराव से प्रताड़ित थी, वहीं सीवर भी उनके आगे फेल हो गया। ऐसी सरकारी व्यवस्था का क्या फायदा जब बारिश में आम आदमी और राजगीरों को खास दिक्कतों का सामना करना पड़ जाए।
क्या सीवर क्या एक आर्टिफिशियल के तौर पर लगाए गए हैं..?, क्या नाल दिखावे के तौर पर बने हुए हैं..?, यह दृश्य विभूति खंड क्षेत्र का है, पर ज्यादातर राजधानी के हिस्सों में ऐसा माहौल देखने को मिला.
हालांकि इसके लिए सरकारी विभाग व स्थानीय पार्षद खासतौर पर जिम्मेदार हैं। घोटाले पे घोटाला कर नाले और सीवर की मरम्मत व निर्माण की बातें सामने आती है.पर ऐसा कार्य व ऐसा सरकारी पैसे का दुरुपयोग, जिससे आम आदमी को बार-बार तकलीफें झेलनी पड़ती है..?, हैरत की बात है की राजधानी की जनता ऐसे विभागों और पार्षदों के भरोसे बैठी हुई है, जो सुधरने वाले नहीं.







