चकिया/चंदौली
चकिया विकासखंड के बिकापुर गांव में मनरेगा के तहत नाली खुदाई कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस समय क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हो रही थी और लोग अपने घरों में दुबके हुए थे,
उसी दौरान मनरेगा के मस्टर रोल में 71 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बारिश के बीच आखिर इतने मजदूर मौके पर किस तरह काम कर रहे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर नाली खुदाई का कार्य और मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की संख्या में अंतर की जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थलीय सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
मौके पर नाली खुदाई का नामोनिशान नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार स्थलीय निरीक्षण के दौरान नाली खुदाई का कार्य अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दिया, जबकि कागजी अभिलेखों में कार्य प्रगति पर दर्शाए जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मस्टर रोल में दर्ज 71 मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, उनके कार्यस्थल तथा किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
NMMS फोटो और जियो-टैगिंग पर भी सवाल
मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता के लिए NMMS के माध्यम से उपस्थिति और जियो-टैगिंग की व्यवस्था है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि बिकापुर के उक्त कार्य से संबंधित NMMS फोटो, समय, लोकेशन और अपलोड रिकॉर्ड की जांच की जाए। यदि बारिश के दौरान उपस्थिति दर्ज हुई है तो रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए।
माप पुस्तिका और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से माप पुस्तिका (MB), मस्टर रोल, कार्य की स्वीकृति, मजदूरी भुगतान और अन्य अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अभिलेखों में दर्ज कार्य और मजदूरों की उपस्थिति वास्तविक है या नहीं।
जिम्मेदार तंत्र की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में रोजगार सेवक, मेट और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा में कार्य की वास्तविक स्थिति और अभिलेखों का नियमित मिलान होना चाहिए, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग की कोई संभावना न रहे।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी वास्तविकता
ग्रामीणों ने चकिया ब्लॉक प्रशासन और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष स्थलीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौके की स्थिति, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, NMMS रिकॉर्ड, जियो-टैगिंग, मस्टर रोल और भुगतान अभिलेखों का मिलान कराया जाए।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल
अगर 71 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई, तो बारिश के बीच मौके पर काम कितना हुआ?
क्या मस्टर रोल, NMMS फोटो और जियो-टैगिंग रिकॉर्ड मौके की वास्तविक तस्वीर से मेल खाते हैं?
इन सवालों का जवाब विभागीय जांच से ही सामने आएगा।







