वाराणसी। रामेश्वर का सुप्रसिद्ध लोटा -भंटा मेला आस्था और विश्वास को लेकर सोमवार को लगा। वरुणा नदी में स्नानकर मन्दिर में आस्थावानों ने मत्था टेका और मंगल कामना की। इसके बाद मन्दिर, बारजा, बगीचों व धर्मशालाओं में अहरा लगाकर बाटी चोखा दाल का आनन्द उठाया। रामेश्वर महादेव मन्दिर के पुजारी अन्नू तिवारी के अनुसार श्रद्धा- आस्था व विश्वास के आगे तिथियां छोटी हो जाती हैं,यह मेला आपसी सत्भगव और प्रेम का प्रतीक हैं। ग्रामीण अपनी सुविधानुसार वरुणा में डुबकी लगाकर मन्दिरों में दर्शन कर अहरा लगाकर प्रसाद बनाकर भगवान को भोग लगाने के बाद स्वयं ग्रहणकर मेला का आनन्द उठाया।

मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने यहां एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग की स्थापना कर की थी। शिव व राम का पहला मिलन स्थल जिसे रामेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।जिस पर सिंधिया नरेश ने विशाल घाट व मन्दिर का निर्माण कराया। रावण वध के बाद भगवान श्री राम को ब्रह्महत्या का पाप लग गया। जिसका प्रायश्चित करने के लिए श्रीराम ने अन्न का त्याग कर दिया। जिसके बाद श्रीराम काशी आए और यहां एक मुट्ठी रेत का शिवलिंग बना कर लोटा जल से पूजा कर बाटी -चोखा प्रसाद बनाकर भगवान शिव को भोग लगाया और वही प्रसाद को खा कर अन्नत्याग के प्रायश्चित को समाप्त करते हुए

भगवान श्रीराम ने अपना व्रत तोड़ा। जो लोटा-भंटा मेला के नाम से जाना जाने लगा है।मेला परिक्षेत्र में प्रकाश और ध्वनि विस्तारक यत्र से खोया पाया की सूचना के प्रसारण के साथ साथ लोगो को अपने सामान की सुरक्षा के निर्देश प्रसारित होता रहा।मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए जंसा एस ओ,चौकी प्रभारी रामेश्वर,बड़ागांव थाना प्रभारी,सहित क्षेत्र के अन्य थानों की पुलिस बल के साथ साथ महिला पुलिस मेले क्षेत्र के भ्रमण करते नजर आए।, एस डी एम राजातालाब,नायब तहसील दीपाली मौर्य,राजस्व निरीक्षक ओम प्रकाश दुबे,खंड विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, क्षेत्रीय ग्राम प्रधान घनश्याम यादव,पूर्व ग्राम प्रधान डॉ राम ,ग्राम प्रधान भोपतपुर मनीष कुमार पाण्डेय रसूलपुर कैलाश यादव सहित अन्य समाजसेवी संगठन ने मेलार्थियों की सेवा करते दिखे।










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