विकास खंड पहाड़ी के बेलवन गांव में रेलवे पिलर प्लांट संचालक की खुलेआम मनमानी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय ग्राम सभा से बिना किसी अनुमति के धड़ल्ले से चलाए जा रहे इस उद्योग ने पर्यावरण और सरकारी मानकों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। इस अवैध कारोबार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन पूरी तरह आंखें मूंदकर बैठा हुआ है, जिससे अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्राम सभा के प्रस्ताव व बिना अनुमति और नाम के चल रहा अवैध प्लांट
जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार और प्रधान संघ के जिला प्रभारी रामदेव सरोज ने प्लांट संचालक की पोल खोलते हुए बताया कि इस उद्योग के लिए न तो ग्राम सभा से कोई अनुमति या एनओसी ली गई है और न ही मानकों का पालन हो रहा है। संचालक की मनमानी का आलम यह है कि प्लांट पर आज तक इसके नाम या वैध पहचान का कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। बिना पहचान के चल रहा यह प्लांट सीधे तौर पर प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

ओवरलोड वाहनों से तबाह सड़कें और बढ़ता प्रदूषण
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि पिलर निर्माण की सामग्री ढोने के लिए धड़ल्ले से ओवरलोड वाहनों का संचालन किया जा रहा है। इससे क्षेत्र की सड़कें तबाह हो रही हैं, वहीं उड़ती धूल और भारी प्रदूषण से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका भारी असर पड़ रहा है।
प्रदूषण बोर्ड का नोटिस सिर्फ कागजी खानापूरी?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आर.के. सिंह की भूमिका बेहद संदिग्ध है। अधिकारी द्वारा सिर्फ मौखिक रूप से नोटिस जारी करने की बात कही जा रही है, लेकिन मांगने पर शिकायतकर्ताओं को नोटिस की प्रति नहीं दी जा रही है। सवाल यह है कि नोटिस छिपाने की क्या मजबूरी है?दूसरी तरफ, जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध प्लांट पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेगी।







