संध्या के समय जैसे ही कथा का शुभारंभ हुआ, पूरा पंडाल हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और श्रद्धालु पहुंचे।
परम श्रद्धेय आचार्य विनोद माधव महाराज के ओजस्वी वचनों से बही ज्ञान गंगा
कथा के दूसरे दिन कथा व्यास परम श्रद्धेय आचार्य विनोद माधव महाराज (प्रयागराज) ने अपने मधुर व ओजस्वी वचनों से भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप और उनके चरित्र का अत्यंत सुंदर वर्णन किया। महाराजश्री ने शिव कथा के विभिन्न प्रसंगों को समझाते हुए बताया कि भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और सच्चे मन से की गई उनकी आराधना से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उनके मुख से शिव महापुराण की कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गए और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
महाआरती और भजन-कीर्तन से जीवंत हुआ भक्तिमय माहौल
कथा के उपरांत आयोजित संध्या आरती में मुख्य यजमानों के साथ-साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से भाग लिया। दीपों की रोशनी और सामूहिक मंत्रोच्चार के बीच हुई भव्य महाआरती ने सभी का मन मोह लिया। इसके पश्चात संगीतकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए मनमोहक भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा। आयोजन के अंत में उपस्थित सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिसके साथ ही दूसरे दिन का यह पावन धार्मिक अनुष्ठान शांति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।







