नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार की घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा सम्मान और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं। तो आम नागरिक की आवाज की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। यह सवाल आज पूरे मीडिया जगत और सरकार के सामने मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग नई दिल्ली ने पत्रकारों के सम्मान सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की अपील की है।
आयोग के विशेष सलाहकार सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और जनता की आवाज है। जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार अन्याय प्रशासनिक लापरवाही या जनसमस्याओं को उजागर करता है। तो उसका उद्देश्य किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी निभाना नहीं बल्कि व्यवस्था को जवाबदेह बनाना होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों को ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय अपमान दुर्व्यवहार या असुरक्षा का सामना करना पड़े। तो स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता कैसे मजबूत होगी।
अब बिखरने का नहीं एकजुट होने का समय
सुरेश कुमार शर्मा ने देशभर के प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया संस्थानों संपादकों संवाददाताओं तथा स्वतंत्र पत्रकारों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग पर मीडिया जगत शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से एक साझा अभियान चलाए। तो इस आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि मीडिया संस्थान आपसी सहमति से दो तीन दिनों के प्रतीकात्मक विरोध या अन्य शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक कार्यक्रम पर विचार करें। जरूरत पड़ने पर आगे की रणनीति भी व्यापक सहमति से तय की जाए। हालांकि, किसी भी अभियान की रूपरेखा पत्रकारों की सुरक्षा जनहित और आवश्यक समाचार सेवाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
सरकार से सीधा सवाल पत्रकार सुरक्षा कानून कब
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था धमकी और हिंसा के मामलों में प्रभावी कार्रवाई तथा पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने का सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि पत्रकार किसी सत्ता के विरोधी नहीं बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह लोकतंत्र के प्रहरी हैं। पत्रकारों की आवाज सुनना सरकार की कमजोरी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मजबूती की पहचान है।
उन्होंने केंद्र सरकार से पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करने और पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
संदेश साफ है। पत्रकार सुरक्षित तभी लोकतंत्र सशक्त
यह लड़ाई किसी एक संगठन एक चैनल एक अखबार या एक पत्रकार की नहीं है। यह पत्रकारिता की गरिमा नागरिकों के सूचना के अधिकार और लोकतंत्र में जवाबदेही को मजबूत करने की मांग है।
न खबर के आगे झुकेंगे न सच से पीछे हटेंगे।
पत्रकारों को राजनीतिक पक्षधरता से ऊपर उठकर अपने अधिकारों कर्तव्यों और सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। शांतिपूर्ण तथ्यपरक और संवैधानिक तरीके से उठाई गई सामूहिक आवाज सरकार और समाज दोनों का ध्यान आकर्षित कर सकती है।
सुरेश कुमार शर्मा
राष्ट्रीय अध्यक्ष के विशेष सलाहकार
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग नई दिल्ली







