मीरजापुर
मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, मीरजापुर में घुटने के दर्द से परेशान रोगियों के लिए नई चिकित्सा सुविधा प्रारंभ की गई है।
महाविद्यालय के निश्चेतना विभाग के पीड़ा निवारण प्रभाग की टीम द्वारा सहायक आचार्य शशि कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जोड़ घिसने के रोग और अन्य पीड़ा संबंधी रोगों के उपचार के लिए स्वरक्त बिंबाणु पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।
जोड़ घिसने के रोग में घुटने के जोड़ की चिकनी झिल्ली धीरे-धीरे घिस जाती है, जिससे घुटने में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होती है। सीढ़ियां चढ़ने, अधिक देर तक चलने और पालथी मारकर बैठने पर यह दर्द बढ़ जाता है।
इस पद्धति में रोगी के स्वयं के रक्त से बिंबाणु को अलग करके पीड़ित स्थान पर सुई के द्वारा लगाया जाता है। इससे दर्द और सूजन में आराम मिलता है तथा शरीर के ऊतकों के स्वयं ठीक होने की प्रक्रिया को बल मिलता है। हालांकि हर रोगी में घिसी हुई झिल्ली का पूरी तरह से दोबारा बनना तय नहीं है।
चिकित्सकीय जांच के आधार पर इस पद्धति और अन्य पीड़ा प्रबंधन तकनीकों से निम्न रोगों में उपचार किया जा रहा है –
* घुटने का दर्द और जोड़ घिसने का रोग • कमर दर्द और नस दबने का दर्द • गर्दन का दर्द • कंधे का दर्द • गठिया • कर्क रोग से जुड़ा दर्द
प्रधानाचार्य संजीव कुमार सिंह ने बताया कि किस रोगी को कौन सा उपचार देना है, इसका निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा रोगी की जांच और रोग की स्थिति के आधार पर किया जाता है। चिकित्सा महाविद्यालय में इस नई पद्धति के शुरू होने से पीड़ा से परेशान रोगियों को शीघ्र लाभ मिलेगा।










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