गोरखपुर
चाइनीज़ मांझे की घातकता को देखते हुए गोरखपुर पुलिस ने इसके खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। शहर में पिछले दिनों चाइनीज़ मांझे से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अलग-अलग स्थानों पर कई लोग घायल हुए। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इसके इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चाइनीज़ मांझा सामान्य पतंग की डोर से कहीं अधिक खतरनाक माना जाता है। सड़क पर दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह गंभीर खतरा बन सकता है। गर्दन, हाथ-पैर और चेहरे पर डोर के फंसने से चोट लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। यही वजह है कि इसकी तुलना अब केवल पतंग की डोर से नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा खतरे के रूप में की जा रही है।
पिछले दिनों शहर के अलग-अलग इलाकों में मांझे से जुड़ी घटनाओं के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक गिरफ्तारी की और मामूली बरामदगी भी की। फिलहाल चाइनीज़ मांझे की खरीद-बिक्री पर रोक है और पुलिस इसके कारोबार से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।
बड़ा सवाल कारोबारियों तक पहुंचने का
हालांकि पुलिस की कार्रवाई जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज़ मांझा बाजार में पहुंच कैसे रहा है। पुलिस के पास खुफिया तंत्र और स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने के तमाम साधन होने के बावजूद बड़े कारोबारियों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच पा रही है, यह सवाल भी चर्चा में है।
जरूरत इस बात की है कि केवल छोटे विक्रेताओं अथवा मामूली बरामदगी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि इस अवैध कारोबार की पूरी कड़ी की पहचान कर उसके बड़े कारोबारियों तक पहुंचा जाए।
लोगों की सुरक्षा के लिए सख्ती जरूरी
चाइनीज़ मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की सख्ती जरूरी है। साथ ही आम नागरिकों को भी प्रतिबंधित मांझे की खरीद-बिक्री अथवा इस्तेमाल की जानकारी होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले इस खतरनाक डोर पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।










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