मीरजापुर
विकास खण्ड-जमालपुर, मीरजापुर क्षेत्र के चौकियां ब्रांच माईनर सहित अन्य नहरों में पशुपालकों द्वारा मृत पशुओं के शवों को फेंके जाने से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नहरों में शव पड़े रहने से पानी का बहाव बाधित हो रहा है तथा कई स्थानों पर नहरें जाम भी हो जा रही हैं।
इस कारण खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।नहर के पानी में पशुओं के शव सड़ने पर दुर्गंध फैलने से आसपास के लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तो वहीं सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को नहरों की सफाई करने में भी काफी कठिनाई हो रहा है।

अन्न दाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने कहा कि मृत पशुओं को फेंकने के लिए राजस्व विभाग की नियमावली के अनुसार सभी ग्राम पंचायतों में जमीन छोड़ा गया है,
लेकिन पशुपालक अपने मृत पशुओं के शवों को वहां न लें जाने की बजाय सड़क किनारे नहरों,नालियों में ही फेंक देते हैं, जिस कारण से सिंचाई की समस्या सहित पर्यावरण बिगड़ने एवं संक्रमण फैलने का भी खतरा बढ़ जाता है।
पशुपालकों का कहना है कि मृत पशुओं को फेंकने के लिए जगह तो है,लेकिन वहां तक जाने का मार्ग नहीं है,जिस कारण से मजबूरी बस शवों को नहरों,नालियों में फेकना पड़ता है।
किसानों द्वारा प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिले के सभी ग्राम पंचायतों में पशुओं के शवों को फेंकने के लिए सुरक्षित जमीन को चिंहित कर चार पहिया वाहनों के जाने योग्य पहुंच मार्ग का निर्माण कराने की मांग की गई है।







