सकलडीहा चंदौली
विंध्य परियोजना के खिलाफ महाआंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन। प्रदर्शन स्थल के लिए निकलने से ठीक पहले पुलिस ने घर पर घेराबंदी कर किया नजरबंद।
किसान नेता ने कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा—”किसानों की आवाज दबा रही सरकार”।
विंध्य क्षेत्र में प्रस्तावित मेगा ‘विंध्य परियोजना’ के खिलाफ स्थानीय किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख किसान नेता पिंटू पाल को स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुबह आवास पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया है।
प्रशासन ने यह कदम कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया है। सोमवार तड़के सुबह ही भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों ने किसान नेता पिंटू पाल के आवास को चारों तरफ से घेर लिया। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनके आवास पर आने-जाने वाले लोगों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति के किसी भी बड़ी सभा या मार्च को रोकने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। किसान नेता पिंटू पाल पिछले लंबे समय से विंध्य परियोजना का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि इस परियोजना के कारण सैकड़ों किसान परिवार बेघर हो जाएंगे और उनकी उपजाऊ जमीनों का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों की मुख्य मांगों में जमीन का उचित बाजार मूल्य, स्थानीय युवाओं को रोजगार और विस्थापितों का सही पुनर्वास शामिल है।
पिंटू पाल के नेतृत्व में हजारों किसानों का परियोजना को लेकर एक सामान्य कार्यक्रम था। हाउस अरेस्ट होने के बाद पिंटू पाल ने फोन और सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “प्रशासन पुलिस के दम पर हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन रहा है। हमें घर में कैद करके सरकार किसानों के आक्रोश को दबा नहीं सकती।
जमीन हमारी है, हक हमारा है और इसके लिए विंध्य परियोजना के खिलाफ हमारी लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी। पिंटू पाल को नजरबंद किए जाने की खबर फैलते ही विंध्य क्षेत्र के किसानों और किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। कई गांवों में किसानों ने छोटी-छोटी बैठकें कर आगे की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
इस हाउस अरेस्ट में पिंटू पाल के साथ कई किसान नेता शामिल रहे।







