बनारस में कहने को तो मौसम बदलता रहता है, लेकिन एक चीज़ जो सालों से नहीं बदली, वह है यहाँ के कुछ खास गलियारों का ‘सिस्टम’। एक बार फिर शहर का सबसे बड़ा जुए का अड्डा गुलज़ार हो चुका है। चर्चा गर्म है कि थाना जैतपुरा क्षेत्र में जुआ माफिया निक्की का दबदबा आज भी वैसा ही कायम है, जैसा पहले हुआ करता था।
अब पुलिस का अपना घिसा-पिटा और तयशुदा बयान है— “हम लगातार दबिश दे रहे हैं, लेकिन निक्की मौके से भाग निकलने में कामयाब हो जाता है।” अब इस ‘भाग निकलने’ के पीछे पुलिस की ढिलाई है या सही समय पर मिल जाने वाली कोई ‘गुप्त सूचना’, यह तो बनारस के पान की अड़ियों पर बैठे लोग भी बखूबी समझते हैं।
50 करोड़ की संपत्ति और 1 करोड़ की दांव!
लेकिन इस खेल का सबसे दिलचस्प मोड़ निक्की अकेले नहीं है। इस बार इस महफ़िल का ‘असली फाइनेंसर’ कोई और ही बताया जा रहा है। खबर है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक और जाने-माने स्टील कारोबारी आशीष निगम इस खेल के मुख्य खिलाड़ी बने हुए हैं।
कहा जा रहा है कि आशीष निगम खुद 1 करोड़ रुपये से भी अधिक के दांव लगाने और खिलवाने में मशगूल हैं।
निक्की और आशीष निगम की यह ‘पार्टनरशिप’ इन दिनों कामयाबी की नई सीढ़ियां चढ़ रही है—और यह सब कुछ घट रहा है जैतपुरा थाना क्षेत्र की नाक के ठीक नीचे!
एक तरफ जहाँ आम आदमी छोटे-मोटे व्यापार और रोजी-रोटी के लिए पुलिसिया नियमों के फेर में फंसा रहता है, वहीं दूसरी तरफ 1-1 करोड़ का जुआ बिना किसी डर के जारी है। जैतपुरा पुलिस की ‘दबिश’ की फाइलें शायद मोटी हो रही हों, लेकिन धरातल पर निक्की और आशीष निगम का यह ‘कसीनो’ बदस्तूर जारी है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कप्तान साहब का चाबुक इस सिंडिकेट पर चलेगा, या फिर जैतपुरा में ‘दबिश’ का यह पुराना नाटक यूँ ही चलता रहेगा?







