वाराणसी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग मे ‘संतों की संचार दृष्टि और आचार्य परशुराम द्विवेदी’ विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय संत परंपरा की संचार शैली, समाज में उनके विचारों की प्रासंगिकता तथा हिंदी साहित्य के विद्वान आचार्य परशुराम द्विवेदी के योगदान पर गंभीर विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संतों ने अपने सरल, सहज और लोकभाषा आधारित संदेशों के माध्यम से समाज में समानता, नैतिकता, प्रेम और मानवता का संदेश प्रसारित किया। उनकी संचार दृष्टि आज भी सामाजिक समरसता और जनजागरण के लिए प्रेरणादायी है।
वक्ताओं ने आचार्य परशुराम द्विवेदी के साहित्यिक एवं शोधपरक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने संत साहित्य के संरक्षण, अध्ययन और व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का कार्य किया है।
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए और संत साहित्य की वर्तमान समय में उपयोगिता पर चर्चा की। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, संचार के मानवीय मूल्यों तथा समाज निर्माण में संतों की भूमिका पर सार्थक संवाद हुआ।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक संगोष्ठियां विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।










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