“एक पेड़ मां के नाम” अभियान को जनचेतना का स्वरूप देने की पहल, जौनपुर से उठी हरित भारत की प्रेरक आवाज

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जौनपुर

पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी बन चुका है। ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और घटता हरित क्षेत्र मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। तब जनपद जौनपुर से एक सकारात्मक और प्रेरक पहल सामने आई है। वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट ने महाराजगंज थाना क्षेत्र के राजा बाजार में पौधरोपण कर यह संदेश दिया कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील समाज ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला रख सकता है।

संस्था के चेयरमैन एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में ट्रस्ट के महामंत्री राजेश गौतम सहित पदाधिकारियों, महिला विंग और कार्यकर्ताओं ने पौधरोपण करते हुए उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं था, बल्कि समाज में यह भावना विकसित करना था कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।

अपने संबोधन में सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि मां हमें जीवन देती हैं। और प्रकृति जीवन को बनाए रखती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल का संकल्प निभाए, तो यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बन सकता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रदेश महिला विंग अध्यक्ष ममता सिंह, अनामिका पांडेय, मोनी मिश्रा, ममता कश्यप, अरविंद सिंह सहित अनेक समाजसेवियों ने पौधरोपण कर हरित भारत के निर्माण का संकल्प लिया और लोगों से भी इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की।

आज आवश्यकता केवल पौधरोपण की नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित करने की जिम्मेदारी भी है। इसी सोच के साथ मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट ने यह संदेश दिया कि सामाजिक संगठन यदि संकल्प, निरंतरता और जनसहभागिता के साथ कार्य करें। तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रभावी मिसाल बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टि से देखें तो “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मातृ सम्मान और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। ऐसे प्रयास तभी स्थायी परिणाम देंगे, जब समाज का प्रत्येक नागरिक इसमें सहभागी बने।

जौनपुर से उठी यह पहल देश के अन्य सामाजिक संगठनों और नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

 

रिपोर्ट –  सुरेश कुमार शर्मा

 

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