लखनऊ।
ईरान संकट के दौरान विश्व की सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी सप्लाई लाइन मानी जाने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कुछ समय के लिए बंद हुई तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट एक बार फिर अस्थिर हो गया।कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने यह याद दिलाया कि विश्व भी ऊर्जा के मामले में कितना संवेदनशील है।
हालांकि होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद आपूर्ति सामान्य हो गई,लेकिन इस संकट ने कई देशों को अपनी लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
इतिहास बताता है कि ऐसे संकट से केवल कुछ महीनों की परेशानी नहीं आती है,बल्कि आने वाले दशकों की ऊर्जा नीति भी तय करती है।इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि हर झटके के बाद एनर्जी पॉलिसी में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले।
अब ईरान संकट को तेल गैस क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे गंभीर झटका माना गया है तो ये तय है कि आने वाले समय में विश्व के देश अपनी एनर्जी पॉलिसी में बड़े बदलाव करने जा रहे हैं।
1973 का अरब तेल प्रतिबंध के समय अरब देशों ने इज़राइल का समर्थन करने वाले अमेरिका और पश्च










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