चकिया (चंदौली)
मानसून से पहले धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट पानी का है। नेवाजगंज पश्चिम पंप कैनाल क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हालात यह हैं कि 15 मार्च से सरकारी नलकूपों को बिजली आपूर्ति नहीं मिली, जिससे खेतों तक पानी पहुंचना बंद हो गया है और किसानों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
धान की फसल के लिए इस समय नर्सरी (बेहन) तैयार करने का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। लेकिन पानी के अभाव में खेत सूखे पड़े हैं। जिन किसानों ने खेती की तैयारी में हजारों रुपये खर्च कर दिए हैं, उनकी उम्मीदें अब प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई और बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी समस्या से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं। कई बार शिकायत के बावजूद न तो बिजली आपूर्ति बहाल हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो धान की बुआई प्रभावित होगी और पूरे सीजन की खेती पर संकट गहरा जाएगा। इसका असर न केवल किसानों की आय पर पड़ेगा बल्कि क्षेत्र के कृषि उत्पादन पर भी दिखाई देगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान कराया आकृष्ट कर लगाई गुहार
क्षेत्रीय किसानों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वे स्वयं नेवाजगंज पश्चिम पंप कैनाल क्षेत्र के मामले को संज्ञान लेकर दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा लें। किसानों का कहना है कि कागजों में योजनाएं चल रही हैं, लेकिन धरातल पर खेत प्यासे हैं और किसान परेशान।
आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति शुरू कर नलकूपों को चालू नहीं कराया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि खेती-किसानी ही उनकी जीविका का आधार है और इस आधार को बचाने के लिए वे हर संभव लड़ाई लड़ेंगे।
बड़ा सवाल
जब धान की बुआई का सबसे अहम समय चल रहा है, तब आखिर किसानों को सिंचाई के लिए बिजली क्यों नहीं मिल रही? क्या जिम्मेदार विभाग किसानों की फसल बर्बाद होने का इंतजार कर रहा है, या फिर प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम उठाएगा इस दौरान नीतिश कुमार पिटू विमलेश मिटू अशोक किशन समेत बिभिन्न ग्रामीण मौजूद







