चहनिया चन्दौली
स्थानीय क्षेत्र के गाव सभा भलेहटा में सात द्विवसीय श्री शिवपुराण महाकथा के पहले दिन सोमवार को कथा वाचक सत्यनारायण स्वामी महाराज ने अपने मधुर वचनांे से भगवान शिव के प्राकट्य व उनकी महत्ता का वर्णन कर दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस पवित्र ग्रंथ को सुनने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा की शुरुआत नैमिषारण्य तीर्थ में सूतजी और शौनकादि ऋषियों के संवाद से शुरू किए। ब्रह्मा और विष्णु का विवाद पहले दिन के प्रसंग में आता है कि कैसे सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा और विष्णु (सृष्टि के रचयिता और पालक) में स्वयं को श्रेष्ठ मानने को लेकर विवाद हो गया था।

कि अचानक भगवान शिव एक अनंत ज्योतिर्लिंग (अग्नि के स्तंभ) के रूप में प्रकट हुआ। और ब्रम्ह व विष्णु जी के विवाद को शान्त करवाया। इस घटना से सिद्ध होता है कि शिव ही इस सृष्टि के आदि और अंत हैं। सत्यम् शिवम् सुन्दरम पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हुए स्वामी जी ने बताया कि सत्य ही शिव है और शिव ही सुंदर है। भारतीय दर्शन और हिंदू धर्म में ईश्वर (परम ब्रह्म) के तीन शाश्वत और सर्वाेच्च रूपों को दर्शाता है। सत्य वह परम सत्य या वास्तविकता जो शाश्वत और अपरिवर्तनीय है।
जो समय, स्थान या परिस्थिति के बदलने पर कभी नहीं बदलता। शिवम (शिव/कल्याण) का अर्थ शुभता, कल्याण या पवित्रता है। जो परम चेतना समस्त प्राणियों का भला करती है और शांति प्रदान करती है। सुंदरम का अर्थ दिव्य सौंदर्य, सौंदर्यपरक गुण और परमानंद है।
यह केवल बाहरी रूप नहीं, बल्कि उस आंतरिक आनंद और आकर्षण को प्रकट करता है जो ब्रह्मांड की रचना में मौजूद है। वही स्वामी जी ने आज क ेसमाज पर व्यंग करते हुए कि आज का समाज सत्य विल्कुल दूर होता जा रहा है। जिससे धर्म की हानी हो रहीऔर व्यभिचार उत्पन्न होने लगा जिसका भार पृथ्वी पर बढ़ने लगा है।
जो आगे आने वाले सम में भयावह हो सकता है। इसलिए हे! श्रोताआंे आप अपने जीवन में सदा सत्य बोलने का प्रयास करे भगवान शिव की कृपा बनी रहेगी। कथा समाप्ति के बाद भगवान शिव की आरती के उपरान्त श्रोताओ में प्रसाद का वितरण किया गया।
इस दौरान उपेन्द्र मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, मुन्ना सिंह, विजय सिंह, राजेन्द्र सिंह सहित सैकड़ो श्रोता मौजूद रहे।







