प्रयागराज।
7 जून को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में नाटक गांधारी का भव्य मंचन किया गया। समन्वय संस्था की यह कार्यशाला परक प्रस्तुति है। सुषमा शर्मा के निर्देशन में नाटक गांधारी कलाकारों द्वारा तैयार किया गया था ।आलेख डॉक्टर हेतु भारद्वाज का है। महाभारत के युद्ध के पश्चात जब गांधारी धृतराष्ट्र वेदव्यास विदुर के साथ संसार से विरत होकर वनवास के लिए जंगल में जाते हैं तो वहां भी धृतराष्ट्र और गांधारी के मन में चलने वाला वैचारिक द्वंद्व उन्हें उद्वेलित करता रहता है
उनकी दशा देखकर वेदव्यास उन्हें श्री कृष्ण के शरण में जाने को कहते हैं इधर यादव वंश की आंतरिक कलह से दुखी होकर कृष्ण सारथी बारूक के साथ जंगल में शरण लेते हैं जहां वह जरा नामक बहेलिया के तीर से महाप्रयाण को प्राप्त होते हैं तत्पश्चात शकुनी जरा और बारूक को लेकर गांधारी के समक्ष पहुंचता है। जरा और बारूक श्री कृष्ण का अंतिम संदेश बताते हैं की श्री कृष्ण ने संदेश दिया है

कि श्री कृष्ण के रूप में उनका पूर्णावतार हो चुका है अब कोई अवतार नहीं होगा इसलिए अब मानव जाति के लिए आत्मनिर्भरता और कर्मठता के संदेश के साथ ही नाटक समाप्त होता है। इस अवसर पर नाटककार डॉक्टर हेतु भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में अपने पुत्र एवं पुत्रवधू के साथ उपस्थित रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में अतुल द्विवेदी निदेशक लोक जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान लखनऊ सुदेश शर्मा निदेशक उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पर प्रयागराज एवं डॉ सुशील सिंन्हा निदेशक द्वारिका हॉस्पिटल उपस्थित रहे। अतुल द्विवेदी ने मुख्य अतिथि डॉक्टर हेतु भारद्वाज को स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
नाटक में मिताली वर्मा ने गांधारी की मुख्य भूमिका में शानदार अभिनय किया तथा ऋतिक श्रीवास्तव चंकी बच्चन अरुण शुक्ला यासमीन जहां विजय कुमार जगदीश गौड़ दीपेंद्र सिंह मोहम्मद आबिद एवं आकाश तिवारी ने अपने अपनी भूमिका में सराहनीय काम किया। संचालन डॉ अशोक शुक्ला ने किया। डॉ शारदा पाठक में सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में गणमान्य सुशील राय ,मधु रानी शुक्ला, प्रसिद्ध कलाकार रवीन्द्र कुशवाहा, अविचल द्विवेदी, मीना उरांव, प्रवीण, आलोक नायर आदि वरिष्ठ रंगकर्मी एवं सुधिदर्शक उपस्थित रहे।










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