सकलडीहा चंदौली
चंदौली क्षेत्र के बर्थरा ताल के विभिन्न खेतों में शासन और प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में नियमों की धज्जियां उड़ाने का खेल बदस्तूर जारी है। एक तरफ जहां सरकार ने खेतों से अवैध खनन और मिट्टी उठान के लिए जेसीबी (JCB) मशीनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है, वहीं दूसरी तरफ प्रतिबंध के बाद भी खेतों में रैपर मशीनें और जेसीबी खुलेआम गरज रही हैं।
बार्थरा ताल के विभिन्न खेतों में नियमों को ठेंगा दिखा रहे खनन माफिया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिबंध के बावजूद क्षेत्र के कई गांवों में धड़ल्ले से अवैध खनन का काम चल रहा है। भू-माफिया रात के अंधेरे में तो खेल करते ही थे, लेकिन अब दिनदहाड़े भी खेतों का सीना चीरकर मिट्टी निकाली जा रही है। उपजाऊ खेतों को गहरे गड्ढों में तब्दील किया जा रहा है, जिससे भविष्य में कृषि योग्य भूमि के बंजर होने का खतरा मंडराने लगा है।
रैपर मशीनों से पर्यावरण और मवेशियों को नुकसान खतरा पैदा हो रहा है काटने और ठूंठ (नरई) को साफ करने के नाम पर चलाई जा रही रैपर मशीनों पर भी प्रशासन ने कड़े रुख अपनाए थे। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर इन मशीनों का संचालन किया जा रहा है। अत्यधिक धूल और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यह जमीनी स्तर पर छोटे जीवों और मवेशियों के चारे के संकट को भी बढ़ावा दे रही हैं।
आलम यह है कि मुख्य सड़कों से लेकर संपर्क मार्गों तक मिट्टी लदे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ सड़कें जर्जर हो रही हैं, बल्कि आए दिन हादसों का अंदेशा भी बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसकी सूचना कई बार स्थानीय अधिकारियों को दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ढाक के तीन पात ही नजर आते हैं।
प्रतिबंध के बाद भी इतने बड़े पैमाने पर भारी मशीनों का चलना स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में चर्चा है कि बिना विभागीय सांठगांठ के इस तरह का अवैध कारोबार मुमकिन नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन चेतता है या फिर भू-माफिया यूं ही शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे।







