वाराणसी, 2जून 2026,
कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब वाराणसी की जनता स्वास्थ्य सुविधाओं, ऑक्सीजन, इलाज और बुनियादी जनसुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही थी, तब जनता की आवाज़ उठाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर प्रशासन ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय मुकदमे लादने का रास्ता चुना। लेकिन छह वर्षों बाद न्यायालय के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनहित की लड़ाई लड़ने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिशें अंततः न्याय के सामने टिक नहीं सकतीं।
वाराणसी की माननीय एमपी-एमएलए / अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ की अदालत ने कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमे की सुनवाई के बाद युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओम शंकर शुक्ला को सभी आरोपों से पूर्णतः निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है।
यह वही मुकदमा था जो उस समय दर्ज किया गया था जब कांग्रेस कार्यकर्ता कोरोना काल में बदहाल जनसुविधाओं, प्रशासनिक लापरवाही और जनता की समस्याओं को लेकर आवाज़ उठा रहे थे। सवाल यह है कि जनता के अधिकारों की मांग करना अपराध था या फिर उन मांगों को दबाने के लिए लोकतांत्रिक विरोध को अपराध की तरह पेश करना?
न्यायालय के इस फैसले ने पुलिस और प्रशासन की उस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, जिसमें जन आंदोलनों और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। यदि आरोपों में दम था तो न्यायालय ने उन्हें खारिज क्यों किया? और यदि आरोप निराधार थे, तो ऐसे मुकदमों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
ओम शंकर शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र मिश्रा, अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी तथा अधिवक्ता गौरव केशरी ने प्रभावी पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने स्पष्ट रूप से उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के बाद समर्थकों और युवाओं में उत्साह का माहौल रहा। इस अवसर पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, जनसंघर्षों और सच की जीत है। राजनीतिक द्वेष और सत्ता के दबाव में दर्ज किए गए मुकदमों की सच्चाई आज न्यायालय के फैसले से उजागर हो गई है।
उन्होंने कहा कि युवा आवाज़ों को मुकदमों से डराने की कोशिशें आगे भी जारी रह सकती हैं, लेकिन संविधान, लोकतंत्र और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले युवा पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुकदमे हार गए, जनसंघर्ष जीत गया। सत्ता का दमन हारा, संविधान की आवाज़ जीती।”*
जारीकर्ता:
कार्यालय, युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव (उत्तर प्रदेश)
दिनांक: 02 जून 2026
स्थान: वाराणसी










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