मिर्जामुराद नारद महाराज ने कहा कि मानव तन बड़े ही भाग्य से मिलता हैं।मानव जीवन को धन्य बनाने हेतु ईश्वर का चिंतन कर कर्म करें।ईश्वर एक हैं और वह सर्वत्र विद्यमान हैं, पर उनका दर्शन गुरुकृपा से ही संभव हैं।परमात्मा ही सत्य और कर्म ही धर्म हैं।ईश्वर के दर्शन हेतु इंद्रियों को वश में कर श्रद्धा व समर्पण भाव से सदगुरु की शरण मे जाना होगा।
परमहंस आश्रम, शक्तेशगढ़ के वरिष्ठ संत नारद महाराज बुधवार की रात खोचवां (रूपापुर) में सेवानिवृत्त शिक्षक रामजग सिंह के घर पर आयोजित सुंदरकांड व जागरण कार्यक्रम में भक्तों को आशीर्वचन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि दुर्लभ मानव तन पाने के बाद भी इंसान मोह-माया में फंस भटक रहा हैं।मन ही बंधन व मुक्ति का कारण हैं।भजन परमात्मा का ही गीत हैं उसे समर्पित भाव से करने पर दुर्गुण दूर होते हैं।मानव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला ही सद्गुरु होता हैं।ढाई अक्षर के ओम व राम नाम का जाप करें।नारद महाराज के आगमन पर भक्तों ने डीजे, ढोल-नगाड़े, शंखनाद एवं पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया।
इस अवसर पर भंडारा का आयोजन किया गया।भंडारे में भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया।आयोजनकर्ता शैलेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह ‘डाक्टर’, डब्ल्यू राय, शैलेन्द्र सिंह ‘पिन्टू’, सभाजीत यादव, शशिकांत, आशीष, विनीत, विपिन, दिनेश, सत्यप्रकाश, रितेश, विवेक समेत अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।







