वाराणसी:
धर्मनगरी काशी से इंसानियत और आध्यात्मिकता की एक अनोखी मिसाल सामने आई है, जहां एक समाजसेवी ने मानवता का धर्म निभाते हुए हजारों किलोमीटर दूर से आए एक विदेशी नागरिक को हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई दिलाई।

जानकारी के अनुसार, कनाडा के नागरिक टारस तनास्सोव अगस्त महीने में पारिवारिक विवाद के बाद वाराणसी पहुंचे थे। काशी आने के बाद वह गंगा घाटों पर रहने लगे और धीरे-धीरे यहां की आध्यात्मिक जीवनशैली में रम गए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनकी वेशभूषा और लंबी जटाओं के कारण वह एक सन्यासी की तरह दिखाई देते थे और घाटों पर रहकर जरूरतमंदों की मदद भी करते थे।
बीते दिनों मणिकर्णिका घाट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। विदेशी नागरिक की मौत के बाद उनकी पहचान और परिजनों से संपर्क करना बड़ी चुनौती थी।

ऐसे में समाजसेवी अमन कबीर और उनकी संस्था “अमन कबीर सेवा न्यास ट्रस्ट” आगे आए। उन्होंने न केवल टारस के परिवार से संपर्क साधा, बल्कि कनाडा एंबेसी से भी अंतिम संस्कार की अनुमति प्राप्त की।
परिजनों की सहमति मिलने के बाद मंगलवार को टारस तनास्सोव का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर पूरे हिंदू विधि-विधान से किया गया। उनकी शवयात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई, जिसने इस घटना को और भी भावुक और खास बना दिया।
पहली पत्नी से हुई वीडियो कॉल पर बात
टारस की पहली पत्नी एलेन ने वीडियो कॉल के माध्यम से अमन कबीर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते टारस घर छोड़कर काशी चले गए थे, जहां उन्हें गंगा किनारे मानसिक शांति मिली और उन्होंने साधना शुरू कर दी।
बीमारी से जूझ रहे थे टारस
स्थानीय लोगों के अनुसार, टारस काफी समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उनका इलाज मंडलीय अस्पताल में भी कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका।
यह घटना काशी की उस पहचान को उजागर करती है, जहां इंसानियत, आस्था और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती। यहां आने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी देश का हो, अंततः इसी मिट्टी में अपनापन पा लेता है।







