वाराणसी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर जहां देशभर में पारंपरिक कार्यक्रम हुए, वहीं काशी के घौसाबाद लच्छीपुरा कॉलोनी में श्रद्धा का एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां सैकड़ों लोगों ने अपने ही रक्त से बाबासाहेब की तस्वीर बनाकर उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बताया जाता है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। ‘भारतीय संविधान के शिल्पकार’ के रूप में प्रसिद्ध बाबासाहेब ने जीवनभर सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ संघर्ष किया। उनके इसी संघर्ष से प्रेरित होकर कार्यकर्ताओं ने यह अनूठी पहल की।
यह आयोजन कांग्रेस के झारखंड प्रभारी राहुल राज के निर्देशन में हुआ। उनके आह्वान पर कार्यकर्ता आंध्रापुल स्थित लच्छीपुरा कॉलोनी में एकत्र हुए और रक्तदान के जरिए तस्वीर तैयार की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में करीब 100 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर तस्वीर की नींव रखी। जैसे-जैसे लोग जुड़ते गए, तस्वीर को और विस्तार दिया गया। आयोजकों का कहना है कि “जितना अधिक रक्त, उतनी ही सशक्त श्रद्धांजलि।”
राहुल राज ने कहा, “बाबासाहेब ने समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके आदर्शों के लिए हमारा यह छोटा सा प्रयास है।”
हालांकि, इस अनोखी पहल पर डॉक्टरों ने चिंता भी जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह रक्त का उपयोग संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। बावजूद इसके, आयोजकों का दावा है कि साफ-सफाई और प्राथमिक उपचार का पूरा ध्यान रखा गया।
फिलहाल, इस ‘रक्त से सींची गई श्रद्धांजलि’ की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है—जहां कुछ लोग इसे समर्पण की मिसाल मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा कदम बता रहे हैं।







