BHU के ज्योतिषाचार्य बोले- उज्जैन में होती है सटीक काल गणना वैश्विक समय निर्धारण होगा आसान,महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” पर होगी संगोष्ठी
ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन काल से “विश्व गुरु” रहे भारत की खगोलीय परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में मध्य प्रदेश का उज्जैन एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक उज्जैन और समीपवर्ती डोंगला में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। इससे पहले बीएचयू में “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
महाकाल की धरता से होती है सटीक काल गणना
खगोलशास्त्रियों की मान्यता है कि यह उज्जैन नगरी पृथ्वी और आकाश की सापेक्षता में ठीक मध्य में स्थित है। कालगणना के शास्त्र के लिए इसकी यह स्थिति सदा उपयोगी रही है। इसलिए इसे पूर्व से ‘ग्रीनविच’ के रूप में भी जाना जाता है। प्राचीन भारत की ‘ग्रीनविच’ यह नगरी देश के मानचित्र में 23.9 अंश उत्तर अक्षांश एवं 74.75 अंश पूर्व रेखांश पर समुद्र सतह से लगभग 1658 फीट ऊंचाई पर बसी है।
इसी भौगोलिक स्थिति के कारण इसे कालगणना का केंद्र बिंदु कहा जाता है और यही कारण है कि प्राचीनकाल से यह नगरी ज्योतिष का प्रमुख केन्द्र रही है। जिसके प्रमाण में राजा जयसिंह द्वारा स्थापित वेधशाला आज भी इस नगरी को कालगणना के क्षेत्र में अग्रणी सिद्ध करती है।
अब जानिए क्या है उद्देश्य
प्रोफेसर विनोद पाण्डेय ने कहा – इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य उज्जैन के निकट स्थित डोंगला ग्राम को विश्व के मध्याह्न (मेरिडियन) के रूप में प्रतिष्ठित करना है। कर्क रेखा पर स्थित डोंगला को कालगणना का सटीक केंद्र बिंदु माना जाता है, जिससे इसे वैश्विक समय निर्धारण के संदर्भ में विशेष महत्व मिल सकता है।







