साईरन बजते ही इस्राइल की जनता बंकरों में छुप जाती है जबकि भीषण बमबारी के बावजूद ईरान की लाखों जनता सड़कों पर इकट्ठा होकर रेजीम के सामने “इस्राइल-अमेरिका” से बदला लेने की माँग करती है।
मिसाईल, ड्रोन, गोला-बारूद और टेक्नोलॉजी भी तब ही काम करेगी जब जनता में साहस होगी। इस्राइल वाले अपने नागरिकों में साहस किस टेक्नोलॉजी के ज़रिए स्टोर करेंगे?
यह युद्ध ट्रम्प का फ्रस्ट्रेशन है। यूरोप और अमेरिका तीसरी दुनिया को नीच, असभ्य और लीचड़ समझता है। ट्रम्प इसी फ्रस्ट्रेशन में है की जिस तीसरी दुनिया के नेताओं को एक चाबुक में औक़ात में लाकर प्रेड करा देते है उसी तीसरी दुनिया का एक देश ईरान अमेरिका से बात करने के लिए भी तैयार नहीं है। ईरान की यह बात ट्रम्प के दिमाग पर मिसाईल और ड्रोन से अधिक चोट कर रहा है। इसलिए वह पहले से ज्यादा पागल हो गया है।









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