लखनऊ: मामला कानूनी कार्रवाई का दुरुपयोग से प्रेरित ‘लखनऊ के गोसाई गंज थाना का , विद्युत विभाग द्वारा ,दिनेश कुमार पर विद्युत चोरी से संबंधित F.IR दर्ज करायी गयी थी, फतेहपुर के मूल निवासी दिनेश पर उनके चचेरे भाई की रंजिशें के चलते विद्युत अधिनियम धारा 135 में दुर्भावना से वर्ष 2016 में गोसाईं गंज थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने बिवेचना कर, आरोप पत्र दाखिल किया और जिस पर मजिस्ट्रेट अदालत’ लखनऊ ने अभियुक्त के खिलाफ संज्ञान लेते हुए, समन निर्गत किया था. इस कार्रवाई से व्यथित, दिनेश कुमार ने इस समन आदेश सहित संपूर्ण अपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए याची ने अपने विद्वान अधिवक्ता कौशलेंद्र त्रिपाठी के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय, खंडपीठ लखनऊ में मामला दाखिल किया, जो शुक्रवार को नए मामलों में सूचीबद्ध था।
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की बेंच में याची पक्ष के अधिवक्ता कौशलेंद्र त्रिपाठी ने दलील दी कि इस तरह की अनावश्यक कार्यवाहियों एवं कमजोर साक्ष्य से न्यायालय का क़ीमती समय बर्बाद होता है. जबकि प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है. रिकार्ड के अवलोकन एवं तर्कों से संतुष्टि प्रकट करते हुए माननीय न्यायालय ने निचली अदालत की सम्पूर्ण कार्रवाई को रद्द करने का आदेश पारित किया।
जबकि विपक्ष में विद्युत विभाग, के अधिवक्ता और सरकार की तरफ से ए. जी. ए. ने विरोध किया, कि याची राहत पाने हकदार नहीं है,मामला विचारण में है , इस स्तर पर हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है. उभय पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने संपूर्ण आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने का आदेश पारित किया ।
उक्त प्रकरण में केस की ब्रीफिंग विवेक चंद मिस्र और वैभव पांडे ने किया,! माननीय न्यायालय के इस निर्णय से याची और उनके परिजन को बड़ी राहत मिली है।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला







