चन्दौली शहाबगंज
कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को विकासखंड स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम विकासखंड साहबगंज मे आयोजित किया गया इसमें फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नरेंद्र रघुवंशी के कुशल निर्देशन में परियोजना के नोडल वैज्ञानिक डॉ. चन्दन सिंह ने किसानों को बताया की फसल अवशेष जलाने से मृदा में मौजूद सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं इसमें पोषक तत्वों की मात्रा घटती है मिट्टी कठोर होती है और उसकी जल धारण क्षमता कम हो जाती है
उन्होंने कहा कि जीवांश पदार्थ लगातार घटने से मृदा बंजर बनने लगती है और फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है अवशेष जलाने से मृदा का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान अवशेषों को खेतों में ही डिकंपोजर की मदद से सड़ाये।उन्होंने बताया कि हैपी सीडर, मल्चर ,रोटावेटर, सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर जैसे कृषि यंत्र अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोगी है साथ ही किसानों से अपील की वे अपने गांव में इस बारे में जागरूकता फैलाए ।
केंद्र के वैज्ञानिक मनीष कुमार सिंह ने बताया कि घर में उपयोगी सब्जी एवं फल अवशेष को भी ना जलाएं इसे सड़ा कर कंपोस्ट में उपयोग करें जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी उत्पादन गुणवत्ता युक्त होगा।










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