पद्मश्री से सम्मानित 102 वर्षीय वयोवृद्ध साहित्यकार रामदरश मिश्र का शुक्रवार की रात दिल्ली में निधन हो गया।
वे बढ़ती आयु के साथ आने वाली शारीरिक दिक्कतों का सामना कर रहे थे। उनके निधन से साहित्यजगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई है।
वे जितने समर्थ कवि थे उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी। उनकी लंबी साहित्य-यात्रा समय के कई मोड़ों से गुजरी है और नित्य नूतनता की छवि को प्राप्त होती गई है।
किसी वाद के कृत्रिम दबाव में नहीं आये बल्कि उन्होंने अपनी वस्तु और शिल्प दोनों को सहज ही परिवर्तित होने दिया।







