वाराणसी। कर्तव्यनिष्ठा, तत्परता और मानवता का परिचय देते हुए चौबेपुर थाना क्षेत्र के मोकलपुर ढाब निवासी उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही संदीप यादव ने लखनऊ में ड्यूटी के दौरान एक बुजुर्ग की जान बचाकर सराहनीय कार्य किया है। अचानक हार्ट अटैक आने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे बुजुर्ग को सिपाही ने तत्काल सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर राहत पहुंचाई। उनकी इस तत्परता की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।
लोग उन्हें काशी का बहादुर लाल बताते हुए बधाई दे रहे हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिपाही संदीप यादव लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रहीमनगर पुलिस चौकी पर तैनात हैं। ड्यूटी के दौरान क्षेत्र में एक बुजुर्ग सब्जी खरीदने के लिए बाजार गए थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आने की सूचना मिली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचे सिपाही संदीप यादव ने बिना देर किए बुजुर्ग को सीपीआर देना शुरू किया।
उनकी त्वरित कार्रवाई से बुजुर्ग को समय पर प्राथमिक सहायता मिल सकी और उनकी जान बचाने में मदद मिली।सिपाही की इस मानवीय पहल की जानकारी सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनके साहस और कर्तव्यपरायणता की प्रशंसा होने लगी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज काका ने भी अपने फेसबुक पेज पर संदीप यादव की सराहना करते हुए लिखा,”हमें ऐसे बहादुर काशी के लाल पर गर्व है।” उनके इस संदेश के बाद सिपाही संदीप यादव की बहादुरी की चर्चा और तेज हो गई।
पुलिस परिवार से जुड़ा है संदीप यादव का परिवार
मोकलपुर ढाब निवासी संदीप यादव तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई रविकांत यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (एसआई) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि सबसे बड़े भाई विवेक यादव गांव में रहकर खेती-बारी संभालते हैं। उनके पिता भी उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में थानाध्यक्ष के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। पुलिस सेवा के दौरान ही बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था।
पिता की पुलिस सेवा की विरासत और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संदीप यादव ने अपने कार्य से यह साबित किया कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में किसी की जिंदगी बचाना भी उसके कर्तव्य का अहम हिस्सा है।
ड्यूटी के दौरान एक बुजुर्ग की मदद के लिए तत्काल आगे आकर उन्होंने न केवल पुलिस विभाग की छवि को गौरवान्वित किया, बल्कि अपने गांव मोकलपुर ढाब और काशी का मान भी बढ़ाया है। उनकी यह पहल कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।







