वाराणसी
बड़ागांव विकासखंड के अंतर्गत खटौरा गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भभागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक डॉ॰चंद्रमणि त्रिपाठी (पूर्व प्राचार्य व्याकरणाचार्य) जी ने राजा परीक्षित के जन्म और भगवान कपिल के अवतार का वर्णन किया । उन्होंने बताया कि ये श्रीमद्भभागवत महापुराण की दो महत्वपूर्ण कथाएं हैं । राजा परीक्षित पांडव वंश के अंतिम चिराग थे। वह अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप धारण कर शिशु के प्राण बचाए ।बालक के गर्भ में भगवान के मोहनी के रूप के दर्शन किए थे । जन्म के बाद वह हर व्यक्ति के चेहरे में उसी रूप को तलाशता था। इस मौके पर मुख्य यजमान चंदेश्वर नारायण सिंह, मंजू सिंह, सुषमासिंह, राजेश्वर सिंह, नागेश्वर सिंह, बिजेश्वर सिंह, हर्षित सिंह, आदर्श सिंह, जितेंद्र सिंह, हेमंत सिंह, गिरीश सिंह, धनंजय सिंह, शांति भूषण व शशिभूषण सिंह आदि लोग उपस्थित थे।








