जौनपुर में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की खुलेआम बिक्री का आरोप, स्टिंग वीडियो से मचा हड़कंप; स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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जौनपुर

जलालपुर बाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के सामने स्थित एक मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की कथित खुलेआम बिक्री का मामला सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। उपलब्ध कराए गए स्टिंग वीडियो और सामने आए तथ्यों ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और ड्रग इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जाता है। कि ऑक्सीटोसिन का दुरुपयोग पशुओं से जबरन अधिक दूध निकलवाने तथा सब्जियों का आकार अप्राकृतिक रूप से बढ़ाने जैसे कार्यों में किया जाता है। इसके अनियंत्रित अथवा अवैध इस्तेमाल को मानव स्वास्थ्य और पशुओं, दोनों के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक माना जाता है। ऐसे में यदि प्रतिबंधित दवा की बिक्री वास्तव में बिना वैध अनुमति और नियमों के विरुद्ध हो रही है। तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ का गंभीर मामला है।

CHC के सामने ही चल रहा था कथित कारोबार!

सबसे बड़ा सवाल यह है। कि जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास स्वास्थ्य विभाग की निगरानी स्वाभाविक रूप से होनी चाहिए, उसी के सामने प्रतिबंधित दवा की कथित बिक्री कैसे चलती रही थी। क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी। या फिर शिकायतों और गतिविधियों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

स्टिंग वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं है। बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही पर खड़ा हो गया है।

अब कार्रवाई नहीं तो किस बात का इंतजार

मामले में स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है। कि स्वास्थ्य विभाग एवं औषधि प्रशासन तत्काल मौके पर जांच कर दवा के नमूने/स्टॉक की जांच, लाइसेंस की वैधता, बिक्री अभिलेख और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल करे। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं। तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

सवाल यह भी है। कि यदि एक प्रतिबंधित दवा खुलेआम बिक रही थी। तो जिम्मेदार निरीक्षण तंत्र इतने समय तक सोया क्यों रहा।

अब गेंद जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, औषधि प्रशासन और जिला प्रशासन के पाले में है। जनता को इंतजार है। कि वायरल स्टिंग के बाद केवल कागजी जांच होगी या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर ऐसी कार्रवाई होगी जो भविष्य में किसी को भी जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दे।

यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं।, तो दोषियों को कानून के तहत कठोरतम दंड दिलाना ही जनहित में सबसे बड़ा संदेश होगा।

 

रिपोर्ट  –  सुरेश कुमार शर्मा

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