वाराणसी
थाना मिर्जामुराद क्षेत्र के अंतर्गत कल्लींपुर निवासी सुरेंद्र बिंन्द का ऑटो था, जिसने लखन प्रजापति को बेचां था, बयान स्वरूप 25 हजार लखन प्रजापति से लिया। ऑटो की कीमत कुल डेढ़ लाख में तय हुआ था। डेढ़ महीने तक लखन अपने पास ऑटो को रख्खां, किसी कारण 1लाख25हजार बकाया पैसा नहीं दे पाया। इसी कारण बस दोनों पक्षों में विवाद उत्पन्न हुआ,
पूरे प्रकरण की मामला चौकी खजूरी पर आने के बाद दोनों पक्षों को खजूरी चौकी पर धर्मेंद्र के मध्यस्थता में बुलाकर दिनांक 22 आठवां महीना 2026 को₹13हजार रुपए में सुलह समझौता हो गया।लखन प्रजापति कें पास पैसे नां होनें कारण धर्मेद्र सें विनतीं की,सर आप 10हजार का मदद करदें बाकी 3हजार मेरें पास हैं, विकास गौड़ कें बारकोड में मानवता कों देखतें हुएं मदद कीं।
जबकि साक्ष्य पूरे मामला को बयां कर रही हैं कीअविनाश कुमार सिंह द्वारा सिपाही 10.हजार विकास गोंड़ के बारकोड में भेजा गया। इसके बाद धर्मेंद्र कुमार नें चार हजार फिर विकास गोंड़ के बारकोड में भेजा गया।टोटल 14हजार दिया गया।
सिपाही द्वारा गांव में जाकर दोनों पक्छों के बीच समझौता के माध्यम से किसी द्वारा वीडियो बनाया गया। नई उम्र के सिपाही होने के कारण लोग लज्जा बचाने के लिए अपने पास से क्रमशः 10,हजार1 बार,फिर 4,हजार एक बार दिया गया।
बारकोड द्वारा प्रमाणित कर रहा है की सिपाही के मोबाइल पर किसी सज्जन का बारकोड है। जो गुनहगार है, बेगुनाहगार को फसाने में किसका रोल है यह तो जांच का विषय है।
सूत्रों द्वारा यह भी पता चला जो भी समझौता के माध्यम से पैसे का बकाया स्वरूप विकास कुमार गौड़ के बारकोड में वापस किया गया।
गांव के सूत्र बताते हैं मोबाइल शॉप की दुकान पर नंबर दो कि मोबाइल का हेरा फेरी भी होता है जिससे गांव के युवक परेशान भी है। बाकी जांच का विषय है।







