श्रोता कथाव्यास पंडित शक्ति तिवारी ने बताया जिस कार्य को 10 हजार राजा नहीं कर पाए, उस कार्य को रघुनाथ जी ने कर के दिखाया उसका सिर्फ एक ही कारण था कि रघुनाथ जी धनुष तोड़ने नहीं बल्कि धनुष यज्ञ देखने आए थे और राजा लोग तोड़ने अर्थात सम्मान पाने आए थे
ये प्रसंग ये संकेत करता है कि सम्मान की भूख लेकर कही जायेगे तो अपमानित होना पड़ेगा इसके बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा पाने के बाद ही धनुष का भंजन किया। इसके बाद बहुत ही मनोरम ढंग से जयमाल का प्रसंग तिवारी जी ने बताए जिसे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और पंडाल अनवरत जय सियाराम और हर हर महादेव के गूज से गुंजायमान रहा







