विंध्य की धरती पर गूंजेगा कविता का शंखनाद! पड़री में सजेगा शब्दों का भव्य दरबार, देश के नामचीन कवियों की प्रस्तुतियों से महकेगी काव्य संध्या

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जनपद मीरजापुर
मीरजापुर। विंध्य की पावन धरती पर साहित्य, संस्कृति और काव्य की अविस्मरणीय छटा बिखेरने के उद्देश्य से शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026 को पड़री बाजार स्थित रामलीला मैदान में भव्य कवि सम्मेलन एवं काव्य संध्या का आयोजन किया जा रहा है। विंध्य साहित्यिक मंच, पड़री के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों, कवियों, बुद्धिजीवियों और क्षेत्रीय नागरिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित कवि अपनी शब्द-साधना, ओजस्वी अभिव्यक्ति, हास्य-व्यंग्य और भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ेंगे।

कार्यक्रम का निर्धारित समय दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक है। पड़री के रामलीला मैदान में आयोजित इस साहित्यिक समारोह के माध्यम से कविता की उस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो समाज को नई दिशा देने, जनमानस की भावनाओं को स्वर प्रदान करने और सामाजिक चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संघर्षों, उम्मीदों, सपनों और विचारों को अभिव्यक्त करने का प्रभावशाली माध्यम है। जब कवि अपनी रचनाओं के जरिए समाज की वास्तविकताओं को शब्द देते हैं, तब साहित्य लोगों के हृदय तक पहुंचता है। इसी भावना के साथ आयोजित यह कवि सम्मेलन पड़री क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्य अतिथि डॉ. संतोष सिंह की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ेगी कार्यक्रम की शोभा

इस भव्य कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संतोष सिंह, निदेशक शिवलोक श्रीनेत महाविद्यालय, पड़री, मीरजापुर शामिल होंगे। शिक्षा जगत से जुड़े मुख्य अतिथि की उपस्थिति कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान करेगी। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रमुख समाजसेवी शैलेंद्र अग्रहरि, मीरजापुर की सहभागिता निर्धारित है।

कार्यक्रम में साहित्य और समाज के बीच संबंधों को मजबूत करने, हिंदी भाषा के प्रति अनुराग बढ़ाने तथा कवियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की भावना प्रमुख रहेगी। कवि सम्मेलन जैसे आयोजन समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करते हैं। यहां शब्दों के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान होता है और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि को नई ऊर्जा मिलती है।

देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुटेंगे कवि, अपनी रचनाओं से सजाएंगे साहित्यिक मंच

इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के कवियों और साहित्यिक प्रतिभाओं को आमंत्रित किया गया है। पोस्टर के अनुसार, वाराणसी, प्रयागराज, गाजीपुर, मुंबई सहित विभिन्न स्थानों से जुड़े कवि अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान करेंगे।

आमंत्रित कवियों में अजय वर्मा, डॉ. चितानंद पांडेय ‘चिद्रूप’, अमित अंजान, सिम्मी पांडेय और नीरज प्रजापति प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनके अतिरिक्त अशोक अग्रहरि (प्रयागराज), सत्यवान साहब (गाजीपुर), जितेंद्र राय साहब (मुंबई) तथा इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ (वाराणसी) को भी आमंत्रित किया गया है।

कवि सम्मेलन में विभिन्न काव्य शैलियों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को साहित्य के विविध रंगों का अनुभव मिलने की उम्मीद है। कविता के माध्यम से जीवन की वास्तविकताओं, सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और देश-समाज से जुड़े विषयों को अभिव्यक्ति देने का अवसर मिलेगा।

हास्य और व्यंग्य जहां श्रोताओं को मुस्कुराने तथा सामाजिक विसंगतियों पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, वहीं भावपूर्ण और ओजस्वी रचनाएं मन में संवेदना, उत्साह और सकारात्मक विचारों का संचार करती हैं। यही कवि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता है कि एक ही मंच पर अलग-अलग भावनाओं और विचारों का साहित्यिक संगम देखने को मिलता है।

संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी सुश्री प्रियंका अग्निहोत्री, सह-संचालक होंगे अजय वर्मा ‘साथी’

कार्यक्रम का संचालन वाराणसी की सुश्री प्रियंका अग्निहोत्री करेंगी। वहीं सह-संचालक के रूप में लखनऊ के श्री अजय वर्मा ‘साथी’ की भूमिका निर्धारित की गई है। किसी भी कवि सम्मेलन में मंच संचालन का विशेष महत्व होता है। संचालक अपनी वाणी, प्रस्तुति और मंचीय संवाद के माध्यम से कवियों की रचनाओं को श्रोताओं तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कवियों की प्रस्तुतियों के बीच उचित समन्वय और कार्यक्रम की साहित्यिक गरिमा बनाए रखना मंच संचालन का महत्वपूर्ण पक्ष है। ऐसे में अनुभवी संचालन के साथ यह काव्य संध्या श्रोताओं के लिए आकर्षक और यादगार अनुभव बनने की उम्मीद रखती है।

आयोजकों की पहल से पड़री में साहित्यिक चेतना को मिलेगा प्रोत्साहन

विंध्य साहित्यिक मंच, पड़री के इस आयोजन के आयोजक डॉ. सर्वेश अग्रहरि ‘वियोगी’, मीरजापुर तथा कृष्ण कुमार अग्रहरि, मीरजापुर हैं। कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में विजय नारायण तिवारी ‘रसिक’ का नाम पोस्टर में अंकित है।

आयोजन से जुड़े लोगों की यह पहल क्षेत्र में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम होने से साहित्य प्रेमियों को प्रतिष्ठित कवियों को सुनने का अवसर मिलता है। साथ ही नई पीढ़ी को हिंदी कविता, रचनात्मक लेखन और साहित्यिक अभिव्यक्ति के प्रति आकर्षित करने में भी सहायता मिलती है।

डिजिटल युग में जहां लोगों का काफी समय मोबाइल और इंटरनेट पर व्यतीत होता है, वहीं प्रत्यक्ष रूप से आयोजित होने वाले साहित्यिक कार्यक्रम भाषा, विचार और मानवीय संवाद की अहमियत को सामने लाते हैं। कवि और श्रोता जब एक ही मंच पर आमने-सामने होते हैं, तो साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं रह जाता, बल्कि जीवंत अनुभव बन जाता है।

हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश

हिंदी साहित्य ने सदियों से समाज को नई सोच, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा दी है। संत साहित्य से लेकर आधुनिक कविता तक, कवियों ने अपने शब्दों के माध्यम से समाज की समस्याओं, जनभावनाओं और समय की चुनौतियों को स्वर दिया है।

कवि सम्मेलन की परंपरा इसी साहित्यिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंच से सुनाई जाने वाली कविता सीधे श्रोताओं के मन और मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है। कभी कविता हंसाती है, कभी भावुक करती है, कभी सामाजिक प्रश्नों पर सोचने को विवश करती है और कभी जीवन में आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान करती है।

पड़री में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भी साहित्य के इसी व्यापक स्वरूप को सामने लाने का अवसर प्रदान करेगा। आयोजन के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने, कवियों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

साहित्य किसी भी समाज की वैचारिक संपदा होता है। युवाओं में पढ़ने-लिखने की आदत, भाषा के प्रति सम्मान और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने में कविता की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन युवाओं को यह समझने का अवसर देते हैं कि शब्दों में समाज को जोड़ने, विचारों को दिशा देने और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा जगाने की क्षमता होती है।

कवि सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों की उपस्थिति युवाओं को अलग-अलग विचारधाराओं, भावनाओं और काव्य शैलियों से परिचित होने का अवसर प्रदान करेगी। साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ने से स्थानीय प्रतिभाओं को भी आगे आने और अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने की प्रेरणा मिल सकती है।

रामलीला मैदान, पड़री में दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक होगा आयोजन

पोस्टर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भव्य कवि सम्मेलन एवं काव्य संध्या शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026 को पड़री बाजार स्थित रामलीला मैदान, जनपद मीरजापुर में आयोजित होगी। कार्यक्रम का निर्धारित समय दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक है।

आयोजकों की ओर से क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, शिक्षकों, समाजसेवियों और आम नागरिकों से कार्यक्रम में पहुंचकर कवियों की रचनाओं का आनंद लेने तथा साहित्यिक आयोजन को प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

यह आयोजन पड़री और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। कविताओं के माध्यम से विचारों की अभिव्यक्ति, भाषा के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा।

आयोजन की प्रमुख जानकारी

कार्यक्रम: भव्य कवि सम्मेलन एवं काव्य संध्या

आयोजक मंच: विंध्य साहित्यिक मंच, पड़री

दिनांक: शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026

समय: दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक

स्थान: रामलीला मैदान, पड़री बाजार, मीरजापुर

मुख्य अतिथि: डॉ. संतोष सिंह, निदेशक शिवलोक श्रीनेत महाविद्यालय, पड़री

विशिष्ट अतिथि: शैलेंद्र अग्रहरि, प्रमुख समाजसेवी, मीरजापुर

संचालिका: सुश्री प्रियंका अग्निहोत्री, वाराणसी

सह-संचालक: अजय वर्मा ‘साथी’, लखनऊ

संरक्षक: विजय नारायण तिवारी ‘रसिक’

आयोजक: डॉ. सर्वेश अग्रहरि ‘वियोगी’ एवं कृष्ण कुमार अग्रहरि

निष्कर्ष: शब्दों की शक्ति, साहित्य की गरिमा और संस्कृति का उत्सव

पड़री में आयोजित होने जा रहा यह भव्य कवि सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के प्रति अनुराग जगाने और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित कवियों, साहित्य प्रेमियों और गणमान्य अतिथियों की सहभागिता से कार्यक्रम को विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है।

विंध्य की धरती पर कविता के स्वर गूंजेंगे, विचारों का आदान-प्रदान होगा और साहित्य की महत्ता का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। आयोजकों की यह पहल क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ हिंदी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के प्रति सम्मान को मजबूत करने का अवसर बनेगी।

 

रिपोर्ट भोलानाथ यादव

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